Advait Energy को ₹150 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, गुजरात में बनाएगी 150 MW की बैटरी स्टोरेज

ENERGY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Advait Energy को ₹150 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, गुजरात में बनाएगी 150 MW की बैटरी स्टोरेज
Overview

Advait Energy Transitions ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम (GUVNL) के साथ 150 MW / 300 MWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज परचेज एग्रीमेंट (BESS) फाइनल कर लिया है। यह 12 साल का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूएबल एनर्जी में कंपनी के विस्तार का संकेत है।

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ग्रिड-स्केल स्टोरेज की ओर बड़ा कदम

Advait Energy Transitions के लिए गुजरात ऊर्जा विकास निगम (GUVNL) के साथ 150 MW / 300 MWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज परचेज एग्रीमेंट (BESS) फाइनल करना एक बड़ा कदम है। इस 12 साल के कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए कंपनी पावर ट्रांसमिशन और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर से निकलकर बड़े ग्रिड-स्केल बैटरी स्टोरेज सेगमेंट में एंट्री कर रही है। यह प्रोजेक्ट गुजरात के भेशन सबस्टेशन के पास लगेगा और राज्य के रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड में आ रही दिक्कतों को दूर करने में मदद करेगा। यह डील राज्य की स्टोरेज इनिशिएटिव के आठवें फेज के तहत हुई है, जिसमें Viability Gap Funding का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

बाजार में मुकाबला और रणनीति

घरेलू यूटिलिटीज अपने नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी टारगेट को पूरा करने के लिए स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रही हैं। हालिया ऑक्शन में बैटरी स्टोरेज की दरें काफी गिरी हैं, जिससे कंपनियों पर लागत कम करने का भारी दबाव है। Advait का जो पुराना पावर ट्रांसमिशन बिजनेस है, उससे उसे 16-17% का ऑपरेटिंग मार्जिन मिलता है, लेकिन उसका नया रिन्यूएबल एनर्जी डिवीजन अभी शुरुआती स्टेज में है। टेंडर-आधारित और कैपिटल-इंटेंसिव मॉडल के चलते Advait का मुकाबला बड़े EPC प्लेयर्स से है। हालांकि, GUVNL जैसी सरकारी कंपनी के साथ 12 साल की लंबी रेवेन्यू स्ट्रीम मिलने से कंपनी के कैश फ्लो में स्थिरता आएगी और वह एक मल्टी-फोकल क्लीन-टेक प्रोवाइडर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

जोखिम और मार्जिन पर दबाव

इस डील के बावजूद, निवेशकों को Advait के सामने मौजूद स्ट्रक्चरल जोखिमों पर भी ध्यान देना होगा। रेवेन्यू तो बढ़ रहा है, लेकिन एनर्जी सेक्टर में आने से मार्जिन प्रोफाइल में भी बदलाव आया है। रिन्यूएबल एनर्जी वर्टिकल फिलहाल कंपनी के पुराने ट्रांसमिशन बिजनेस की तुलना में कम मार्जिन पर काम कर रहा है। साथ ही, कंपनी का बिजनेस वर्किंग-कैपिटल इंटेंसिव है, जिसमें सरकारी कंपनियों से पेमेंट मिलने में देरी आम बात है। कंपनी का प्रीमियम वैल्यूएशन (P/E रेश्योpeers से काफी ऊपर) एग्जीक्यूशन में किसी भी गलती या देरी के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं छोड़ता। अगर कंपनी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव या भेशन साइट के कंस्ट्रक्शन में देरी को मैनेज नहीं कर पाती है, तो मार्जिन पर तुरंत असर पड़ सकता है।

आगे की राह

भविष्य की ग्रोथ इस स्टोरेज एसेट के सफल कमीशनिंग पर निर्भर करेगी। कंपनी के पास बड़ा ऑर्डर बुक और इंस्टीट्यूशनल बैकिंग है, जिससे अब तक उसने अपनी एग्जीक्यूशन क्षमता साबित की है। लेकिन, लंबी अवधि में सफलता के लिए कंपनी को अपने कर्ज को कम रखना होगा और नए मैन्युफैक्चरिंग व रिन्यूएबल डिवीजनों को इस तरह से स्केल करना होगा कि उसके पुराने ट्रांसमिशन बिजनेस की ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर असर न पड़े।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.