Aditya Birla Renewables का बड़ा दांव: Shell की Sprng Energy ₹17,200 करोड़ में खरीदी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Aditya Birla Renewables का बड़ा दांव: Shell की Sprng Energy ₹17,200 करोड़ में खरीदी

Aditya Birla Renewables, Grasim Industries की रिन्यूएबल एनर्जी यूनिट, ने Shell की भारतीय रिन्यूएबल कंपनी Sprng Energy को **₹17,200 करोड़** में खरीदने का ऐलान किया है। इस डील से कंपनी की क्लीन एनर्जी क्षमता में **5 GWp** का इजाफा होगा। यह सौदा रेगुलेटरी मंजूरी मिलने के बाद **2026 के आखिर** तक पूरा होने की उम्मीद है।

रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में बड़ा विस्तार

Aditya Birla Renewables (ABRen) और Shell के बीच हुए इस समझौते के तहत, ABRen को Sprng Energy के 5 GWp के कॉन्ट्रैक्टेड प्रोजेक्ट मिलेंगे। इसमें 3.3 GWp के चालू प्रोजेक्ट और 1.7 GWp के निर्माणधीन प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस अधिग्रहण के बाद ABRen का कुल पोर्टफोलियो बढ़कर 4.4 GWp से काफी ज्यादा हो जाएगा, जिससे कंपनी की सोलर, विंड और हाइब्रिड एनर्जी सेग्मेंट में मौजूदगी मजबूत होगी। इन प्रोजेक्ट्स के लिए लंबी अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPAs) हैं, जो कंपनी को यूटिलिटीज और बड़े व्यावसायिक ग्राहकों से रेवेन्यू की स्थिरता देंगे।

फंड‍िंग और वित्तीय ढांचा

इस बड़े अधिग्रहण के लिए फंड‍िंग डेट (Debt) और इक्विटी (Equity) के मिश्रण से की जाएगी। Grasim Industries के साथ-साथ ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (GIP), जो अब BlackRock का हिस्सा है, भी इसमें कैपिटल इंफ्यूजन करेंगे। Shell को फाइनल इक्विटी पेमेंट डील पूरी होने के समय डेट और कैश के स्तर के आधार पर एडजस्ट किया जाएगा। यह ट्रांजेक्शन 2026 के अंत तक पूरा होने की संभावना है, जिसके लिए जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने होंगे। निवेशकों को Grasim Industries के डेट-टू-इक्विटी रेशियो पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि रिन्यूएबल सेक्टर में भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए डेट मैनेजमेंट बहुत अहम होता है।

एनर्जी सेक्टर में रणनीतिक बदलाव

Shell के लिए, यह डील ग्लोबल स्ट्रेटेजी के तहत है, जिसके तहत वह कैपिटल-इंटेंसिव रिन्यूएबल पावर डेवलपमेंट से हट रही है। कंपनी अब एनर्जी ट्रेडिंग, बायोफ्यूल्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सॉल्यूशंस पर फोकस कर रही है। Shell ने Sprng Energy को 2022 में खरीदा था। वहीं, ABRen के लिए यह कदम भारत के 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी के लक्ष्य के अनुरूप है, जो सेक्टर में बड़े मर्जर और अधिग्रहण (M&A) को बढ़ावा दे रहा है।

भारत में बड़े रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में जमीन अधिग्रहण, ग्रिड कनेक्टिविटी और रेगुलेटरी बदलावों जैसे एग्जीक्यूशन रिस्क होते हैं, जो प्रोजेक्ट्स के चालू होने की टाइमलाइन को प्रभावित कर सकते हैं। इन एसेट्स को एफिशिएंटली इंटीग्रेट करने और जुड़े हुए डेट को मैनेज करने की क्षमता शेयरहोल्डर्स के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। भविष्य में, निवेशकों के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल की प्रगति, कैपिटल स्ट्रक्चर का फाइनल होना और निर्माणधीन 1.7 GWp क्षमता के इंटीग्रेशन की टाइमलाइन सबसे अहम अपडेट्स होंगी।

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