Adani Total Gas (ATGL) ने जून तिमाही में **₹133 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि से **18%** कम है। गैस की बढ़ी हुई खरीद लागत ने रेवेन्यू ग्रोथ को पीछे छोड़ दिया, जबकि कंपनी का कुल रेवेन्यू **27%** बढ़कर **₹1,910 करोड़** हो गया।
Detailed Coverage
गैस खरीद की बढ़ी लागत का असर
Adani Total Gas (ATGL) के लिए जून तिमाही (FY27) के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे। कंपनी का नेट प्रॉफिट 18% घटकर ₹133 करोड़ रह गया। यह गिरावट तब आई जब कंपनी का कुल रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹1,910 करोड़ तक पहुंच गया। रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिट में आई कमी, कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि एनर्जी मार्केट की अस्थिरता के बीच बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट को संभालना मुश्किल हो रहा है।
प्रॉफिट में गिरावट का सबसे बड़ा कारण गैस की खरीद लागत में 39% का भारी उछाल रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में जहां यह लागत ₹1,049 करोड़ थी, वहीं इस बार यह बढ़कर ₹1,454 करोड़ हो गई। कंपनी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन और एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (APM) गैस की बढ़ी हुई सीलिंग प्राइस, इन लागतों को ऊपर ले जा रही है। इसके अलावा, सीएनजी (CNG) सेगमेंट के लिए कम कीमत वाली APM गैस का अलॉटमेंट भी 36% से घटकर 30% रह गया। इस वजह से कंपनी को महंगी और अस्थिर स्पॉट मार्केट गैस पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ा।
ऑपरेशनल ग्रोथ और नेटवर्क विस्तार
प्रॉफिट पर दबाव के बावजूद, Adani Total Gas ने अपने नेटवर्क का विस्तार जारी रखा। कंपनी की सेल्स वॉल्यूम में कुल मिलाकर 13% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें सीएनजी (CNG) सेल्स में 18% और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सेल्स में 4% की मजबूत ग्रोथ देखी गई। कंपनी ने इस तिमाही में पांच नए सीएनजी (CNG) स्टेशन खोले, जिससे कुल स्टेशनों की संख्या बढ़कर 707 हो गई। वहीं, घरेलू पीएनजी (PNG) कनेक्शन में 38,000 से ज्यादा नए ग्राहक जुड़े, जिसके साथ कुल घरेलू पीएनजी (PNG) ग्राहकों की संख्या 11.41 लाख से अधिक हो गई। मैनेजमेंट का कहना है कि कंपनी की स्ट्रेटेजी सप्लाई को लगातार बनाए रखने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर केंद्रित है, भले ही करेंसी की अस्थिरता और गैस की ऊंची कीमतें चुनौतियां बनी हुई हैं।
निवेशकों के लिए अहम बिंदु
निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि APM गैस का अलॉटमेंट कम रहने पर कंपनी अपने मार्जिन को कैसे मैनेज करती है। चूंकि गैस की लागत कंपनी के खर्चों का एक बड़ा हिस्सा है, इसलिए ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज में कोई भी और बढ़ोतरी या सरकार की गैस अलॉटमेंट पॉलिसी में बदलाव, कंपनी के बॉटम-लाइन रिजल्ट्स को प्रभावित कर सकता है। निवेशक यह भी देखेंगे कि कंपनी सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतों में बढ़ोतरी को ग्राहकों पर कितना और कैसे डाल पाती है, बिना डिमांड को नुकसान पहुंचाए। भविष्य की तिमाही रिपोर्टों से पता चलेगा कि क्या ऑपरेशनल एफिशिएंसी और वॉल्यूम ग्रोथ, रॉ मटेरियल की ऊंची लागत के मौजूदा दबाव को कम कर पाएंगी।
