Adani Power ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) के साथ एक बड़ा 25 साल का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) फाइनल कर लिया है। इस डील के तहत, कंपनी MSEDCL को **1,600 MW** बिजली सप्लाई करेगी।
नए प्रोजेक्ट से होगी सप्लाई
यह बिजली एक नए 1,600 MW के अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट से आएगी, जिसमें 800 MW की दो यूनिट्स होंगी। इस प्रोजेक्ट को डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन और ऑपरेट (DBFOO) मॉडल के तहत तैयार किया जा रहा है।
DBFOO मॉडल का मतलब
DBFOO मॉडल का मतलब है कि प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन और उसके लंबे समय तक संचालन की सारी जिम्मेदारी Adani Power की ही होगी। इसका मतलब है कि कंपनी को प्रोजेक्ट शुरू होने तक भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) करना होगा, जिसके लिए उसे या तो भारी कर्ज लेना होगा या अपने रिजर्व फंड का इस्तेमाल करना होगा।
कोयले की फिक्र खत्म
थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए कोयले की सप्लाई सबसे ज़रूरी होती है। Adani Power ने कन्फर्म किया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरी कोयले की सप्लाई (Coal Linkage) सरकार की SHAKTI पॉलिसी के तहत मिल गई है। यह पॉलिसी पावर प्रोड्यूसर्स को फ्यूल सिक्योरिटी देती है, जिससे महंगे इम्पोर्टेड कोयले पर निर्भरता कम होती है और प्रोडक्शन में रुकावट का खतरा घटता है। यह 25 साल के कॉन्ट्रैक्ट के दौरान कंपनी के मुनाफे को स्थिर रखने में मदद करेगा।
भविष्य की कमाई की गारंटी
यह एग्रीमेंट Adani Power को अगले 25 सालों के लिए कमाई की एक पक्की गारंटी देता है, क्योंकि सरकारी यूटिलिटी के साथ PPA से एक रेगुलर इनकम फ्लो बना रहता है। हालांकि, थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स में कंस्ट्रक्शन में देरी या लागत बढ़ने जैसे रिस्क भी होते हैं। 1,600 MW जैसे बड़े प्रोजेक्ट के लिए, इन्वेस्टर्स कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) और प्रोजेक्ट के शुरू होने की टाइमलाइन पर नज़र रखेंगे। इस नए प्रोजेक्ट से कंपनी के बॉटम लाइन (Bottom Line) पर कितना असर पड़ेगा, यह कोयले की लागत, नई यूनिट्स की एफिशिएंसी (Efficiency) और समय पर कंस्ट्रक्शन पूरा होने पर निर्भर करेगा।
