Adani Power में आई **2%** की तेजी, **1,600 MW** पावर सप्लाई डील पक्की

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AuthorNeha Patil|Published at:
Adani Power में आई **2%** की तेजी, **1,600 MW** पावर सप्लाई डील पक्की

Adani Power के शेयरों में आज **2%** की जोरदार उछाल देखी गई, शेयर ₹218.74 पर ट्रेड कर रहे हैं। कंपनी ने **1,600 MW** थर्मल पावर सप्लाई के लिए एक नया एग्रीमेंट साइन किया है। हालांकि, पिछले फाइनेंशियल ईयर में रेवेन्यू घटा है, लेकिन मार्च क्वार्टर में कंपनी के प्रॉफिट में **64%** की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। अब निवेशक इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि कंपनी बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर के साथ-साथ इन लॉन्ग-टर्म पावर कॉन्ट्रैक्ट्स को कैसे मैनेज करेगी।

Adani Power के शेयर क्यों भागे?

सोमवार को Adani Power के शेयरों में 2% का इजाफा देखने को मिला और यह ₹218.74 पर कारोबार कर रहे हैं। कंपनी लगातार हो रहे स्ट्रेटेजिक अपडेट्स के चलते सुर्खियों में बनी हुई है। Nifty Next 50 का यह स्टॉक हालिया कॉर्पोरेट एक्शन और फाइनेंशियल परफॉरमेंस में हो रहे बदलावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

नई पावर सप्लाई डील और फंड जुटाने की योजना

15 जुलाई, 2026 को कंपनी ने 1,600 MW थर्मल पावर की लॉन्ग-टर्म सप्लाई के लिए एक अहम पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) साइन किया है। इस कदम का मकसद कंपनी के लिए रेगुलर रेवेन्यू सुनिश्चित करना और ऑपरेशनल स्टेबिलिटी बढ़ाना है। इस एग्रीमेंट के ठीक बाद, 18 जुलाई, 2026 को कंपनी ने फ्रेश फंड जुटाने की योजना का भी ऐलान किया था, जो कंपनी की कैपिटल एक्सपेंशन योजनाओं को सपोर्ट करने के उसके इरादे को साफ करता है।

फाइनेंशियल परफॉरमेंस और ऑपरेशनल बदलाव

मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे मिले-जुले रहे। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू लगभग सपाट रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 0.10% घटकर ₹14,223.09 करोड़ रहा। हालांकि, टॉप लाइन में स्थिरता के बावजूद, नेट प्रॉफिट पिछले साल की मार्च तिमाही की तुलना में 64.33% बढ़कर ₹4,271.40 करोड़ हो गया। लेकिन, सितंबर 2025 में हुए स्टॉक स्प्लिट के बाद इक्विटी बेस में हुए बदलावों के चलते, इस तिमाही का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) पिछले साल के 6.62 से गिरकर 2.08 पर आ गया।

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (मार्च 2026 को समाप्त) के लिए, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 3.49% घटकर ₹54,240.52 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट में मामूली 1.74% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹12,971.08 करोड़ तक पहुंच गया। निवेशकों को यह ध्यान देना चाहिए कि पिछले साल 32.32 की तुलना में एनुअल ईपीएस (EPS) घटकर 6.62 रह गया।

कैपिटल स्पेंडिंग और कर्ज का स्तर

निवेशकों के लिए कंपनी के भारी कैपिटल स्पेंडिंग पर नजर रखना एक अहम पहलू है। इस साल में इन्वेस्टिंग एक्टिविटीज के तहत ₹26,460 करोड़ का बड़ा आउटफ्लो देखा गया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में आक्रामक निवेश का संकेत देता है। हालांकि, डेट-टू-इक्विटी रेशियो पिछले साल के 0.71 से बढ़कर 0.82 हो गया है, लेकिन कंपनी की पॉजिटिव कैश फ्लो बनाए रखने की क्षमता काबिले तारीफ है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (मार्च 2026 को समाप्त) के लिए नेट कैश फ्लो ₹608 करोड़ रहा, जो पिछले साल के नेगेटिव ₹816 करोड़ के मुकाबले एक बड़ा सुधार है।

यह सेक्टर रेगुलेटरी बदलावों और सरकारी पावर परचेज पॉलिसीज़ के प्रति काफी संवेदनशील है। जैसे-जैसे कंपनी अपने विस्तार पर काम कर रही है, सबसे अहम बातें 1,600 MW की नई सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट का सफल कार्यान्वयन, जुटाए गए फंड का प्रभावी उपयोग और ज्यादा कैपिटल एक्सपेंडिचर की बीच स्वस्थ प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की कंपनी की क्षमता होंगी। थर्मल पावर की मांग में बदलाव और पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) मानकों को लेकर रेगुलेटरी जांच भी कंपनी के भविष्य के ऑपरेशनल आउटलुक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.