Adani Power Ltd. ने Q4 FY26 के लिए अपने नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 64% बढ़कर ₹4,271 करोड़ हो गया है। हालांकि, यह शानदार उछाल मुख्य रूप से टैक्स खर्चों में कमी और अन्य आय की वजह से आया है, न कि कंपनी के कोर रेवेन्यू में हुई ग्रोथ से। इस तिमाही में कंपनी का कोर रेवेन्यू लगभग सपाट रहा, जो 0.10% घटकर ₹14,233 करोड़ पर पहुंचा। इन सबके बावजूद, कंपनी का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 27% की मजबूती के साथ ₹6,498 करोड़ तक पहुंच गया, जो इसकी ऑपरेशनल एफिशिएंसी को दर्शाता है।
कंपनी ने इस तिमाही में 27.2 बिलियन यूनिट (BU) बिजली की बिक्री दर्ज की, जबकि पूरे वित्तीय वर्ष (FY26) के लिए यह आंकड़ा 99.15 BU रहा। Adani Power ने अपने लॉन्ग-टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) का विस्तार करते हुए अतिरिक्त 1,600 MW क्षमता को जोड़ा है। इसके साथ, कंपनी की कुल PPA-कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी अब 13.3 GW हो गई है, जो इसकी ऑपरेशनल कैपेसिटी का लगभग 95% कवर करती है। यह उच्च कवरेज कंपनी के लिए आने वाले समय में रेवेन्यू की एक बड़ी और स्थिर विजिबिलिटी सुनिश्चित करता है।
बाजार में Adani Power के शेयर की बात करें तो, 29 अप्रैल 2026 तक यह ₹223.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जिसने हाल ही में ₹226.24 का एक मजबूत हाई भी छुआ था। अप्रैल 2026 के अंत में ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखी गई थी, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी का पता चलता है। साल-दर-साल (YoY) आधार पर, 28 अप्रैल 2026 तक शेयर में लगभग 55.92% का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया था।
वैल्यूएशन के मोर्चे पर, Adani Power का मौजूदा P/E रेश्यो 31.3 से 38.16 के बीच है। यह सरकारी कंपनियों जैसे NTPC (20.23-24.83x) और Power Grid Corporation (19.0-20.23x) से काफी ऊपर है। Tata Power (33.01-36.7x) और Torrent Power (27.58x) की तुलना में यह वैल्यूएशन थोड़ा अधिक है, जबकि JSW Energy (39.41x) और NHPC (43.02x) से कम है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹4.2-4.3 लाख करोड़ है, जो इसे एक बड़ा खिलाड़ी बनाता है। अच्छी बात यह है कि Adani Power ने अपने कर्ज को काफी हद तक कम कर लिया है, जिससे इसका Debt-to-Equity रेश्यो घटकर लगभग 0.68-0.81 तक आ गया है।
वहीं, भारत का ऊर्जा क्षेत्र एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) 2026 का लक्ष्य 2047 तक प्रति व्यक्ति बिजली की खपत को 4,000 kWh से ऊपर ले जाना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करना है। यह पॉलिसी रिन्यूएबल एनर्जी, स्टोरेज और न्यूक्लियर पावर पर जोर देती है। इसके विपरीत, Adani Power फिलहाल 18 GW से अधिक की थर्मल कैपेसिटी पर काम कर रही है और FY32 तक इसे बढ़ाकर 41.87 GW करने की आक्रामक योजना पर है। कंपनी का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए थर्मल पावर ग्रिड की स्थिरता और बेसलोड एनर्जी के लिए बहुत जरूरी है, भले ही राष्ट्रीय नीति रिन्यूएबल्स की ओर बढ़ रही हो।
हालांकि, मुनाफे में इस उछाल के साथ ही कुछ चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। Q4 का प्रॉफिट टैक्स बेनिफिट्स और नॉन-ऑपरेशनल आय पर अधिक निर्भर था, जबकि कोर रेवेन्यू में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। कंपनी की 2024 में रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सिंग 0% थी, जो जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर इसकी भारी निर्भरता को उजागर करती है। FY32 तक 41.87 GW क्षमता विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी की आवश्यकता होगी, जिसमें एग्जीक्यूशन और फाइनेंसिंग से जुड़े जोखिम भी शामिल हैं।
एनालिस्ट्स की बात करें तो, ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म Adani Power को 'Buy' या 'Strong Buy' की सलाह दे रही हैं। हालांकि, उनके 12 महीने के अनुमानित टारगेट प्राइस (लगभग ₹180-187 INR) मौजूदा बाजार भाव से कुछ गिरावट का संकेत देते हैं। हाल ही में, MarketsMOJO ने अपनी रेटिंग को 'Sell' से 'Hold' में अपग्रेड किया है, जो एक न्यूट्रल व्यू को दर्शाता है। कंपनी के CEO, S B Khyalia का भी मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांजीशन के इस दौर में थर्मल पावर भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और ग्रिड स्टेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। Adani Power अपनी कैपेसिटी बढ़ाने के लिए विवेकपूर्ण पूंजी आवंटन (prudent capital allocation) और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर फोकस कर रही है।
