कोयला मंत्रालय की ₹37,500 करोड़ की कोल गैसीफिकेशन स्कीम के लिए 7 बोलियां मिली हैं। Adani Enterprises और NTPC जैसी दिग्गज कंपनियों की भागीदारी से भारत की आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हो गई है।
भारत सरकार की महत्वकांक्षी ₹37,500 करोड़ की कोल गैसीफिकेशन इंसेटिव स्कीम अब मूल्यांकन (Evaluation) के दौर में पहुंच गई है। कोयला मंत्रालय ने साफ किया है कि 7 सितंबर 2026 तक आवेदन के पहले चरण में उन्हें कुल 7 प्रस्ताव मिले हैं। इस स्कीम का मुख्य मकसद कोयले को यूरिया, अमोनिया और सिंथेटिक नेचुरल गैस जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स में बदलकर विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भरता को कम करना है।
प्रमुख खिलाड़ियों की भागीदारी
इस दौड़ में Adani Enterprises ने यूरिया उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते हुए 3 आवेदन जमा किए हैं। वहीं, सरकारी पावर कंपनी NTPC ने सिंथेटिक नेचुरल गैस के लिए अपना प्रस्ताव पेश किया है। इनके अलावा Talcher Fertilisers, Gallantt Ispat और Shyam Sel & Power जैसी कंपनियों ने भी अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए अपनी योजनाएं जमा की हैं। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन की गैसीफिकेशन क्षमता हासिल करना है, जो घरेलू एनर्जी सप्लाई चेन को पूरी तरह बदल सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी और रिस्क
निवेशकों को समझना होगा कि ये प्रोजेक्ट्स बहुत ज्यादा कैपिटल-इंटेंसिव हैं। इनमें शुरुआती खर्च काफी अधिक है और तकनीक जटिल होने के कारण इसके पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। शेयरधारकों को कंपनियों की बैलेंस शीट पर आने वाले कर्ज और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की टाइमलाइन पर खास नजर रखनी चाहिए। चूँकि ऐसे प्रोजेक्ट्स का जेस्टेशन पीरियड (Gestation Period) काफी लंबा होता है, इसलिए कैश फ्लो का लाभ मिलने में सालों लग सकते हैं। साथ ही, ग्लोबल कमोडिटी प्राइस साइकिल का असर इन प्रोजेक्ट्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर सीधा पड़ेगा।
आगे का रास्ता
कोयला मंत्रालय ने 8 सितंबर 2026 से आवेदन का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। सरकार इसे एक 'रोलिंग विंडो' की तरह रखेगी ताकि अन्य इच्छुक कंपनियां भी अपनी योजनाएं जमा कर सकें। मंत्रालय का यह कदम दर्शाता है कि वे इस सेक्टर में लंबे समय के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ये कंपनियां कितनी जल्दी इन प्रोजेक्ट्स को टेक्निकल और फाइनेंशियल रूप से क्लोज कर पाती हैं।
