Adani Group को बड़ी राहत! सोलर टेंडर मामले में नियामक ने दी क्लीन चिट

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AuthorAditi Chauhan | Whalesbook News Team

Overview

भारत के कॉम्पिटिशन कमीशन (CCI) ने Adani Group को **2019** के एक सोलर पावर टेंडर से जुड़े Antitrust दावों से बड़ी राहत दी है। रेगुलेटर ने पाया कि Adani Enterprises और Adani Green Energy द्वारा किसी भी तरह के डोमिनेंस का दुरुपयोग या एंटी-कॉम्पिटिटिव व्यवहार नहीं हुआ है।

जानिए क्या है पूरा मामला?

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने Adani Group के खिलाफ 2019 के एक सोलर पावर टेंडर से संबंधित Antitrust आरोपों को खारिज कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत अपने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का तेजी से विस्तार कर रहा है, जो Adani के कारोबार का एक अहम हिस्सा है। CCI ने टेंडर के डिजाइन और मार्केट डोमिनेंस की परिभाषाओं पर गौर किया, जिससे भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक मिसाल कायम हुई है।

CCI के इस फैसले ने सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) द्वारा जारी 7 GW की सोलर पावर टेंडर में Adani Group की बिडिंग को वैध ठहराया है। रेगुलेटर को बोली-प्रक्रिया में धांधली, मिलीभगत या पक्षपात का कोई सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने 'ग्रीन शू' ऑप्शन जैसी क्लॉज़ को प्रतिस्पर्धा को अनुचित रूप से प्रभावित करने के दावों को भी खारिज कर दिया। इससे Adani Green Energy (ADANIGREEN) और Adani Enterprises (ADANIENT) के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी कंसर्न खत्म हो गया है, जो उनके रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकता है। Adani Green Energy, मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी फर्म है, जिसका शेयर लगभग ₹1,119 पर कारोबार कर रहा है और मार्केट कैप करीब ₹1.84 ट्रिलियन है। वहीं, Adani Enterprises का शेयर लगभग ₹2,204 पर है और मार्केट कैप करीब ₹2.85 ट्रिलियन है। CCI का यह मानना है कि Adani के बड़े पैमाने और वित्तीय मजबूती का दुरुपयोग नहीं हुआ, जो इस सेक्टर के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर है।

बता दें कि भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2025 से 2030 के बीच इसमें 49.5% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिल सकती है। सरकारी नीतियां, एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरतें और टेक्नोलॉजी की गिरती लागतें इस विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं। Adani Green Energy इस बाजार में मार्केट कैप के हिसाब से सबसे बड़ी कंपनी है। हालांकि, इसके वैल्यूएशन मैट्रिक्स, जैसे 100 से ऊपर का P/E रेश्यो, बताते हैं कि स्टॉक में भविष्य की उम्मीदें पहले से ही शामिल हैं। वहीं, NTPC जैसे प्रतियोगियों का P/E रेश्यो करीब 15.70 है। CCI ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि Adani की कंपनियां पावर मार्केट में डोमिनेंट नहीं थीं और रिन्यूएबल्स में उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। हालांकि, Antitrust मामले में मुख्य रहे 'ग्रीन शू' ऑप्शन पर अब पूरे देश में बारीकी से नजर रखी जाएगी और इसके इस्तेमाल के लिए खास अनुमति लेनी पड़ सकती है।

CCI से क्लीन चिट मिलने के बावजूद Adani Group के सामने कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। Adani Green Energy पर कर्ज का अनुपात (डेट-टू-इक्विटी रेश्यो) 6.4 या 3.98 तक है और इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो कम है। Adani Enterprises का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो भी लगभग 1.92 है। Adani Green Energy का बहुत ऊंचा P/E रेश्यो इस बात की ओर इशारा करता है कि इसका वैल्यूएशन भविष्य की ग्रोथ पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले तीन सालों में कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी कमजोर रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CCI का यह फैसला अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चल रहे एक अलग और गंभीर मामले को कवर नहीं करता। इस मामले में 2019 के SECI टेंडर को ₹2,000 करोड़ से ज्यादा की ब्राइबरी (रिश्वत) के आरोपों से जोड़ा गया है, जो भारतीय अधिकारियों को दी गई थी। यह बाहरी कानूनी और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। Adani Green Energy पर विश्लेषकों की राय भी बंटी हुई है; कुछ 'स्ट्रॉन्ग बाय' की सलाह दे रहे हैं, जबकि अन्य 'सेल' रेटिंग दे रहे हैं।

कुल मिलाकर, CCI का यह फैसला Adani Group के लिए रेगुलेटरी राहत लेकर आया है, जो भारत के बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी बाजार में अपनी विस्तार योजनाओं को गति दे सकता है। हालांकि, कंपनी को अपने कर्ज के स्तरों का प्रबंधन करना होगा और अपने वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताओं के साथ-साथ अनसुलझे ब्राइबरी के आरोपों का भी सामना करना होगा।

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