Adani Green Energy के शेयरों में आज **5%** की बड़ी गिरावट देखी गई, जिससे वे दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। यह गिरावट ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) की 'अंडरपरफॉर्म' रेटिंग के बाद आई है। कंपनी ने मुनाफे में **19%** की बढ़ोतरी दर्ज की थी, लेकिन एनालिस्ट्स को Adani Energy Solutions को रिटर्न ट्रांसफर करने और ग्रिड कर्टेलमेंट (grid curtailment) के असर को लेकर चिंताएं हैं।
Detailed Coverage
Adani Green Energy के शेयर क्यों गिरे?
23 जुलाई को Adani Green Energy के शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखा गया, जिसके चलते स्टॉक 5% लुढ़क कर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। इस गिरावट की वजह ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन (Bernstein) की एक रिपोर्ट है, जिसने कंपनी को 'अंडरपरफॉर्म' रेटिंग दी है। बर्नस्टीन ने कंपनी के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड की तारीफ की, लेकिन कुछ स्ट्रक्चरल और ऑपरेशनल चुनौतियों पर भी ध्यान दिलाया, जो भविष्य में निवेशकों के लिए लाभ को सीमित कर सकती हैं।
एसेट ट्रांसफर को लेकर चिंताएं
बर्नस्टीन की इस सतर्क राय का एक बड़ा कारण हाल ही में मर्चेंट जनरेशन (merchant generation) और बैटरी स्टोरेज कैपेसिटी का Adani Energy Solutions को ट्रांसफर किया जाना है। रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि यह कदम Adani Green को नए रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है, लेकिन इससे कंपनी की भविष्य की कमाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रुप की दूसरी कंपनी, Adani Energy Solutions, के पास चला जाएगा। एनालिस्ट्स का मानना है कि निवेशकों को मौजूदा स्ट्रक्चर में इन हाई-पोटेंशियल एसेट्स से सीधा लाभ कम मिल सकता है।
ऑपरेशनल ग्रोथ और ग्रिड की चुनौतियां
बाजार की यह प्रतिक्रिया Adani Green के मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद आई है। जून तिमाही में, कंपनी ने 19.29% की बढ़ोतरी के साथ ₹983 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। कंपनी की कुल आय बढ़कर ₹4,663 करोड़ हो गई, जिसमें ऊर्जा बिक्री में 30% की वृद्धि का बड़ा योगदान रहा। कंपनी की ऑपरेशनल कैपेसिटी अब 20.1 GW हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में 27% अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से गुजरात के खावड़ा (Khavda) और राजस्थान में नए प्रोजेक्ट्स के कारण हुई है।
हालांकि, रिपोर्ट में ग्रिड कर्टेलमेंट (grid curtailment) के मुद्दे पर भी प्रकाश डाला गया है, जहां ट्रांसमिशन बाधाओं के कारण कंपनी को बिजली उत्पादन कम करना पड़ता है। बर्नस्टीन का अनुमान है कि इससे कंपनी के EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) पर 5% से 7% तक का असर पड़ा है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि इस साल की दूसरी छमाही तक ग्रिड संबंधी बाधाएं सामान्य हो जाएंगी, लेकिन यह बड़े रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के लिए एक लगातार बनी हुई चुनौती है।
सेक्टर का माहौल
पावर सेक्टर के व्यापक मूल्यांकन में, बर्नस्टीन ने Adani Power पर 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग बरकरार रखी है। फर्म ने Adani Power पर अपने सकारात्मक रुख के कारणों के रूप में बेहतर मर्चेंट टैरिफ (merchant tariffs) और उच्च ऑपरेशनल एफिशिएंसी का हवाला दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रिन्यूएबल सेक्टर में EBITDA ग्रोथ प्रतिस्पर्धी बनी हुई है, जिसमें Adani Green, Adani Power और JSW Energy लाभप्रदता के मामले में अलग-अलग गति दिखा रहे हैं।
निवेशकों के लिए, अगली महत्वपूर्ण बात कंपनी के 50 GW कैपेसिटी टारगेट की प्रगति और FY27 तक नए प्रोजेक्ट्स की रफ्तार पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि आने वाले महीनों में ग्रिड कर्टेलमेंट के सामान्य होने से लाभ मार्जिन स्थिर होता है या नहीं, और मर्चेंट कैपेसिटी का ट्रांसफर लंबी अवधि के कैश फ्लो पर क्या असर डालता है।
