Adani Green Energy ने चालू फाइनेंशियल ईयर के दूसरे क्वार्टर में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा **16%** बढ़कर **₹747 करोड़** पर पहुंच गया है, जिसके पीछे पावर सप्लाई रेवेन्यू में **45%** का उछाल मुख्य कारण रहा।
Adani Green Energy ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही के लिए दमदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹747 करोड़ रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16% ज्यादा है। कंपनी का पावर सप्लाई रेवेन्यू 45% बढ़कर ₹4,019 करोड़ हो गया है, जो भारत में रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को दर्शाता है।
Khavda में तेजी से बढ़ता ऑपरेशंस
कंपनी की ग्रोथ में गुजरात स्थित 'Khavda' रिन्यूएबल एनर्जी पार्क का बड़ा हाथ है। यहाँ ऑपरेशनल कैपेसिटी 7.1 GW से बढ़कर 10.8 GW हो गई है। सितंबर 2026 तक कंपनी की कुल पोर्टफोलियो कैपेसिटी 20.8 GW तक पहुंच चुकी है, जिसमें सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
बैटरी स्टोरेज पर बड़ा दांव
पारंपरिक बिजली उत्पादन के अलावा, कंपनी 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' (BESS) के क्षेत्र में भी अपनी धाक जमा रही है। 6,632 MWh की ऑपरेशनल कैपेसिटी के साथ कंपनी दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन बैटरी इंस्टॉलेशन चला रही है। मैनेजमेंट का लक्ष्य 10 GWh के शुरुआती टारगेट को पार करना है, जो आने वाले समय में रेवेन्यू का बड़ा जरिया बन सकता है।
फाइनेंशियल हेल्थ और डेट मॉनिटरिंग
कंपनी का एक्सपेंशन काफी आक्रामक है, जिसके लिए पहले हाफ में ₹17,160 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 38% ज्यादा है। निवेशकों को कंपनी के net debt-to-EBITDA ratio पर नजर रखनी चाहिए, जो अभी 5.6 गुना है। चूंकि यह सेक्टर बहुत ज्यादा कैपिटल मांगता है, इसलिए मजबूत कैश फ्लो बनाए रखना कंपनी की प्राथमिकता रहेगी।
चुनौतियां और भविष्य की राह
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना और बजट के भीतर रखना सबसे बड़ी चुनौती है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी या ग्रिड कनेक्टिविटी की समस्याएं भविष्य में कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। शेयरधारकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि बैटरी स्टोरेज से कंपनी को असल में कितनी कमाई होती है और क्या वे कर्ज के स्तर को काबू में रखते हुए अपना विस्तार जारी रख पाते हैं।
