Adani Green Energy के लिए FY27 की पहली छमाही चुनौतीपूर्ण रही है। कच्छ स्थित खावड़ा (Khavda) रिन्यूएबल एनर्जी पार्क से बिजली सप्लाई में दिक्कत के कारण कंपनी के EBITDA में **₹724 करोड़** की कमी आई है।
कंपनी ने बताया कि अगर खावड़ा साइट से पूरी पावर इवैक्यूएशन (Power Evacuation) हो पाती, तो उनका H1 EBITDA ₹8,276 करोड़ के बजाय करीब ₹9,000 करोड़ तक पहुंच सकता था। मुख्य समस्या बिजली को नेशनल ग्रिड तक पहुँचाने वाली ट्रांसमिशन लाइनों की कमी से जुड़ी है।
ट्रांसमिशन में देरी और प्रोजेक्ट की स्थिति
यह बाधा Adani Energy Solutions Ltd के ट्रांसमिशन कॉरिडोर 'फेज-III, पार्ट-ए' में देरी के कारण आई है। 7 गीगावाट रिन्यूएबल कैपेसिटी को ग्रिड से जोड़ने के लिए जरूरी इस प्रोजेक्ट का काम निर्माण और जमीन से जुड़ी दिक्कतों के चलते अब जून 2026 तक टल गया है।
बैटरी स्टोरेज पर शिफ्ट
बिजली बर्बाद न हो, इसके लिए कंपनी ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर जोर बढ़ा दिया है। सितंबर 2026 के अंत तक कंपनी 6,632 मेगावाट-घंटे की बैटरी कैपेसिटी लगा चुकी है और चालू फाइनेंशियल ईयर के अंत तक इसे 10 गीगावाट-घंटे के पार ले जाने का लक्ष्य है। हालांकि, मैनेजमेंट का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी समाधान है, मुख्य चुनौती हाई-वोल्टेज लाइन का समय पर तैयार होना ही है।
ग्रोथ और आउटलुक
इन बाधाओं के बावजूद कंपनी का प्रदर्शन मजबूत है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी की ऑपरेशनल कैपेसिटी 20.76 गीगावाट रही, जो पिछले साल के मुकाबले 24% ज्यादा है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 50 गीगावाट का है, लेकिन फिलहाल निवेशकों की नजरें जून 2026 की डेडलाइन पर टिकी होंगी।
