सेटलमेंट की उम्मीदें, सुनवाई स्थगित
Aban Offshore Limited, जो भारत की ऑफशोर ड्रिलिंग सेवाओं के क्षेत्र में एक प्रमुख कंपनी रही है, अपनी कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में गहराई से फंसी हुई है। हालिया घटनाक्रम के तहत, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT), चेन्नई ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई को 27 मार्च, 2026 तक के लिए आगे बढ़ा दिया है। इस देरी का मुख्य उद्देश्य कंपनी के अपीलांट, यानी निलंबित मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) Reji Abraham, और मुख्य ऋणदाता पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के बीच संभावित सेटलमेंट चर्चाओं के लिए गुंजाइश बनाना है। कंपनी पर 21 जनवरी, 2026 से लागू एक अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।
गहराते वित्तीय संकट का लेखा-जोखा
कंपनी की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिसके कारण यह वर्तमान CIRP स्थिति में है। यह प्रक्रिया 1 सितंबर, 2025 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के एक आदेश के बाद शुरू हुई थी, जब पंजाब नेशनल बैंक ने ₹366.09 करोड़ के डिफॉल्ट का केस दायर किया था। वित्तीय ऋणदाताओं (Financial Creditors) से स्वीकार किए गए दावे की कुल राशि ₹1,191 करोड़ है, जिसमें PNB का हिस्सा सबसे बड़ा, ₹1,077 करोड़ है।
कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं: शेयरधारकों की निगेटिव इक्विटी के कारण डेट-टू-इक्विटी रेशियो -60.6% पर है, इंटरेस्ट कवरेज रेशियो मात्र 0.1 है, और महत्वपूर्ण कंटीजेंट लायबिलिटी ₹1,269 करोड़ की है। पिछले पांच सालों में कंपनी ने लगातार निगेटिव प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, और पिछले एक दशक में रेवेन्यू और सेल्स ग्रोथ में भारी गिरावट देखी गई है।
ऑडिटर्स की 'डिस्क्लेमर कंक्लूजन' का मतलब
हालिया अन-ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स, जो 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए थे, पर ऑडिटर्स ने 'डिस्क्लेमर कंक्लूजन' जारी किया है। इसका मतलब है कि ऑडिटर इन नंबरों की सटीकता और निष्पक्षता पर कोई राय बनाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं जुटा पाए। यह स्थिति पहले से ही नाज़ुक चल रहे मामले में एक और जोखिम की परत जोड़ती है, जिससे हितधारकों के लिए कंपनी के वास्तविक मूल्य या रिकवरी की संभावनाओं का आकलन करना बेहद मुश्किल हो गया है।
जोखिम और भविष्य की राह
Aban Offshore और इसके हितधारकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर कोई समाधान योजना (Resolution Plan) स्वीकृत नहीं हुई तो कंपनी लिक्विडेशन (Liquidation) यानी परिसमापन की ओर बढ़ सकती है। वर्तमान CIRP गंभीर वित्तीय संकट का संकेत है, जो शेयरधारकों के मूल्य को खतरे में डालता है। PNB के साथ वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) प्रस्ताव को लेकर NCLAT का हस्तक्षेप ऋण समाधान की विवादास्पद प्रकृति को उजागर करता है। Aban Offshore के निलंबित MD का दावा है कि PNB ने OTS पर वैसे विचार नहीं किया जैसा निर्देश दिया गया था, जबकि PNB का कहना है कि इस पर विचार किया गया और इसे अस्वीकार कर दिया गया। NCLAT अब PNB से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांग रहा है, जिसकी अगली सुनवाई 27 मार्च, 2026 को होगी।
इसके अलावा, कंपनी पर ₹281 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स (Non-convertible redeemable preference shares) का भी बकाया है, जो 2014 से अनरिडीम्ड (unredeemed) पड़े हैं। ऐतिहासिक रूप से, कंपनी को घटते फ्लीट यूटिलाइजेशन (fleet utilization), 2014 के बाद तेल की कीमतों में आई गिरावट और महामारी के प्रभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
निवेशकों के लिए चिंताएं
कंपनी का निगेटिव बुक वैल्यू ₹-4,605 प्रति शेयर और निगेटिव शेयरहोल्डर इक्विटी ₹-268.8 अरब Aban Offshore की गंभीर वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं। लंबे समय से चली आ रही CIRP प्रक्रिया, ऑडिटर्स के डिस्क्लेमर कंक्लूजन के साथ मिलकर, कंपनी की भविष्य की व्यवहार्यता और इसके निवेशकों व ऋणदाताओं के लिए रिकवरी की संभावनाओं पर बड़े सवाल खड़े करती है। पिछले एक साल में शेयर की कीमत में लगभग 46% की गिरावट ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
