ग्लोबल एनर्जी मार्केट में जारी सप्लाई टेंशन और मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर Adani Total Gas Limited (ATGL) के कारोबार पर दिखा है। कंपनी ने स्थिति का फायदा उठाते हुए अपने इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए गैस के दाम बढ़ा दिए हैं, ताकि गिरते मार्जिन को बचाया जा सके। इस स्ट्रेटेजिक मूव के चलते ATGL के शेयर में 13% से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई और यह अपने एक महीने के हाई के करीब ₹534.25 पर बंद हुआ।
प्राइस हाइक और ट्रेडिंग एक्टिविटी
कंपनी की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार, अब उनके डेली कॉन्ट्रैक्ट वॉल्यूम का 40% से ज्यादा हिस्सा ₹119 प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पर तय किया जा रहा है। यह दाम इसलिए बढ़ाए गए हैं ताकि LNG सप्लाई रूट में आ रही गंभीर दिक्कतों के बावजूद कंपनी अपने मार्जिन को बनाए रख सके। सप्लाई कम होने और कमोडिटी कीमतों के बढ़ने के जोखिम को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। बुधवार को ATGL के शेयर ₹474.90 और ₹544.00 के बीच ट्रेड हुए, आखिर में ₹534.25 पर क्लोज हुए। इस दौरान 59.44 लाख शेयर ट्रेड हुए, जिनकी वैल्यू ₹316.62 करोड़ रही।
ग्लोबल कॉन्फ्लिक्ट और कॉम्पिटिटर वैल्यूएशन
ATGL के शेयर में आई यह तेजी सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों से जुड़ी है, जो शिपिंग और प्रोडक्शन को प्रभावित कर रहे हैं। खबरें हैं कि कतर ने एक घटना के बाद LNG प्रोडक्शन रोक दिया है। भारत के लिए यह एक बड़ी चिंता की बात है, क्योंकि हम अपनी 40% LNG का आयात इसी देश से करते हैं। इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने दूसरे बड़े गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को भी फायदा पहुंचाया है, जिन्हें सप्लाई की कमी के साथ-साथ इंडस्ट्रियल डिमांड भी अच्छी मिल रही है। फिलहाल, ATGL का वैल्यूएशन काफी प्रीमियम है, इसका P/E रेशियो लगभग 58.5x है और मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹31,500 करोड़ है। वहीं, इसके मुकाबले Indraprastha Gas Limited (IGL) का P/E रेशियो 44.2x और Mahanagar Gas Limited (MGL) का P/E 39.8x है, जिनकी मार्केट कैप क्रमशः ₹26,800 करोड़ और ₹17,200 करोड़ है।
वैल्यूएशन कंसर्न और लॉन्ग-टर्म रिस्क
शेयर में फौरी उछाल के बावजूद, ATGL का 58.5x का हाई वैल्यूएशन एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अतीत में भी ऐसी सप्लाई रुकावटों की वजह से शेयर के दाम में अस्थायी तेजी आई थी, लेकिन लागत बढ़ने के दबाव के कारण वे फिर गिर गए थे। कंपनी का इंपोर्टेड LNG पर, खासकर अस्थिर क्षेत्रों से निर्भरता, इसे लगातार प्राइस स्विंग और सप्लाई कट के जोखिम में रखती है, जिन्हें मौजूदा प्राइसिंग पूरी तरह कवर नहीं कर पाती। इसके अलावा, ATGL पर भारी कर्ज भी एक समस्या बन सकता है, अगर ग्लोबल एनर्जी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं या रेगुलेटर इसकी प्राइस हाइक की समीक्षा करते हैं।
एनालिस्ट व्यू और सस्टेनेबिलिटी सवाल
एनालिस्ट्स की राय ATGL को लेकर मिली-जुली है। वैल्यूएशन की चिंताओं के चलते कई 'होल्ड' या 'रिड्यूस' की रेटिंग दे रहे हैं, हालांकि कुछ लोग सप्लाई इश्यूज से शॉर्ट-टर्म मौके देख रहे हैं। ATGL ने यह तो दिखा दिया है कि वह मौजूदा टाइट मार्केट में कॉस्ट को ग्राहकों पर डाल सकती है, लेकिन सवाल यह है कि यह प्राइस हाइक कब तक जारी रह सकती है। रेगुलेटरी रिव्यू की संभावना और ग्लोबल LNG मार्केट में जारी अस्थिरता जैसे फैक्टर प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं।