Anushakti Vidhyut Nigam (ASHVINI) ने राजस्थान के माही बांसवाड़ा न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए ₹28,000 करोड़ का एक विशाल टेंडर जारी किया है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने के लिए चार स्वदेशी 700 MWe रिएक्टर का निर्माण करना है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बूस्ट!
Anushakti Vidhyut Nigam (ASHVINI) ने राजस्थान में माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना (Mahi Banswara Rajasthan Atomic Power Project) के न्यूक्लियर आइलैंड पैकेज के लिए एक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) टेंडर निकाला है। इस टेंडर की कुल वैल्यू ₹28,000 करोड़ से ज़्यादा है। यह टेंडर चार 700 MWe के प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर (PHWR) के डिज़ाइन, निर्माण, उपकरण सप्लाई और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस जैसे अहम कामों को कवर करेगा।
प्रोजेक्ट का रणनीतिक महत्व
यह प्रोजेक्ट भारत की 'फ्लीट मोड' पहल का एक अहम हिस्सा है। इस पहल का मकसद एक जैसे कई रिएक्टरों का निर्माण करके काम को और बेहतर और तेज़ बनाना है। डिज़ाइन और खरीद को स्टैंडर्डाइज करके, सरकार का लक्ष्य परमाणु ऊर्जा के विस्तार में तेजी लाना है। माही बांसवाड़ा साइट पर चार 700 MWe यूनिट्स लगाने की योजना है, जिससे भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के अपने लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
घरेलू प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर प्रोग्राम के लिए ₹28,000 करोड़ का यह पैकेज अब तक के सबसे बड़े पैकेजों में से एक है। भारतीय बाज़ार में, यह बड़ी इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए एक बड़ा मौका है जो जटिल पावर प्रोजेक्ट्स में माहिर हैं। भारी फैब्रिकेशन, सिविल कंस्ट्रक्शन और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से जुड़ी कंपनियां, जो साइट के लिए कंपोनेंट्स सप्लाई करेंगी या विशेष लेबर देंगी, उन्हें इसका सीधा फायदा हो सकता है।
एग्जीक्यूशन और फाइनेंशियल पहलू
हालांकि यह प्रोजेक्ट स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर एक बड़ा कदम है, लेकिन इसकी सफलता समय पर एग्जीक्यूशन पर निर्भर करती है। बड़े परमाणु प्रोजेक्ट्स में अक्सर सख्त सुरक्षा मानकों, रेगुलेटरी अप्रूवल्स और न्यूक्लियर-ग्रेड मैन्युफैक्चरिंग की जटिलताओं से जुड़े जोखिम होते हैं। इस टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों के निवेशकों को प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और ठेकेदारों की लागत प्रबंधन क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि इतने बड़े प्रोजेक्ट में किसी भी देरी से शामिल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ₹42,000 करोड़ के समग्र विकास की प्रगति को चिह्नित किया था, जिसमें यह टेंडर एक केंद्रीय हिस्सा है। बाज़ार के लिए अगले महत्वपूर्ण कदम इंजीनियरिंग फर्मों द्वारा बोलियों का सबमिशन, ठेकेदारों का अंतिम चयन और साइट पर काम शुरू करना होगा। ये अपडेट स्पष्टता प्रदान करेंगे कि कौन से प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर खिलाड़ी इन हाई-वैल्यू कॉन्ट्रैक्ट्स को सुरक्षित करने के लिए तैयार हैं और वे न्यूक्लियर आइलैंड निर्माण की तकनीकी आवश्यकताओं का प्रबंधन कैसे करेंगे।
