ग्रीन एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी AM Green Ammonia ने जर्मनी के H2Global ऑक्शन में बाजी मार ली है। कंपनी को 10 साल के लिए ग्रीन अमोनिया सप्लाई का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जिसकी वैल्यू कम से कम **€585 मिलियन** (करीब **₹5,300 करोड़**) है।
ग्लोबल मार्केट में भारत का दबदबा
Greenko Group की कंपनी AM Green Ammonia ने ग्रीन एनर्जी के ग्लोबल एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी धाक जमा दी है। जर्मनी के H2Global ऑक्शन के तहत मिला यह 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट भारत के रिन्यूएबल फ्यूल एक्सपोर्ट प्लान के लिए एक बड़ी कामयाबी है। यह डील काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) स्थित फैसिलिटी से जुड़ी है, जो अब ग्लोबल मार्केट की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।
क्यों है यह डील खास?
एनर्जी सेक्टर में प्रोजेक्ट्स के लिए 'ऑफ-टेक एग्रीमेंट' यानी खरीदार का पक्का होना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इस डील ने कंपनी के लिए भविष्य की रेवेन्यू विजिबिलिटी साफ कर दी है। कंपनी इस प्रोजेक्ट में राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करेगी, जिसमें विंड, सोलर और पंप-हाइड्रो स्टोरेज का कॉम्बिनेशन होगा। यह तकनीक EU के सख्त मानकों (RFNBO) को पूरा करने के लिए अनिवार्य है।
सावधान रहने वाली बातें (Risk Factors)
हालांकि डील बड़ी है, लेकिन निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया रखना होगा। इसकी पहली सप्लाई 2029 में शुरू होने की उम्मीद है। इतनी लंबी टाइमलाइन के बीच कई चुनौतियां भी हैं:
- एग्जीक्यूशन रिस्क: रिन्यूएबल पावर इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में देरी का डर बना रहता है।
- करेंसी रिस्क: यूरो और भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव मार्जिन्स पर असर डाल सकता है।
- पॉलिसी रिस्क: यूरोपियन यूनियन की ग्रीन एनर्जी नीतियों में बदलाव और ग्लोबल कॉम्पिटिशन का दबाव बना रह सकता है।
अब सबकी नजर काकीनाडा साइट के कंस्ट्रक्शन अपडेट्स और आने वाले समय में कंपनी के पास आने वाले नए ऑर्डर्स पर रहेगी।
