जापान की दिग्गज कंपनी JERA ने भारत की AM Green के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इसके तहत काकीनाडा प्लांट से हर साल **70,000 टन** ग्रीन अमोनिया का निर्यात किया जाएगा, जो शिपिंग सेक्टर में कार्बन-मुक्त ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होगा।
ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए यह एक बड़ी खबर है। जापान की JERA ने भारत की AM Green के साथ 5 साल का करार किया है। इस डील का मुख्य मकसद जापान के शिपिंग जहाजों के लिए कार्बन-फ्री ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित करना है। यह अमोनिया आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में बन रहे AM Green के प्लांट से तैयार किया जाएगा।\n\n### प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और टेक्नोलॉजी\nइस प्लांट के 2028-2029 तक शुरू होने की उम्मीद है। इस सुविधा को खास तरीके से डिजाइन किया गया है, जो राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी और लार्ज-स्केल इलेक्ट्रोलेसिस तकनीक पर आधारित होगी। यह सीधे तौर पर यूरोप और जापान जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के कड़े उत्सर्जन मानकों को पूरा करती है।\n\n### भारत के लिए क्या हैं मायने?\nयह समझौता भारत के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत धीरे-धीरे ग्रीन हाइड्रोजन डेरिवेटिव्स के ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के रूप में अपनी जगह पक्की कर रहा है।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी (Risk Factors)\nहालांकि, यह डील भारत की क्षमता को दर्शाती है, लेकिन निवेशकों को इसके लंबे समय के टाइमलाइन को ध्यान में रखना चाहिए। 2028-2029 तक कमीशनिंग में काफी समय है। इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निर्माण में देरी या ग्लोबल मार्केट में ग्रीन फ्यूल की मांग में बदलाव जैसे रिस्क बने रहते हैं। अभी यह देखना बाकी है कि क्या प्रोडक्शन कॉस्ट अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य लो-कार्बन विकल्पों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनी रह पाएगी या नहीं।
