All India Distillers’ Association (AIDA) ने साफ कर दिया है कि भारत की कुल इथेनॉल सप्लाई में अब 70% हिस्सेदारी ग्रेन-बेस्ड इथेनॉल की है। इस खबर ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया है जिनमें फूड सप्लाई बाधित होने का दावा किया जा रहा था।
All India Distillers’ Association (AIDA) ने इथेनॉल सेक्टर से जुड़ी फूड सिक्योरिटी की चिंताओं को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। इंडस्ट्री बॉडी का कहना है कि भारत का इथेनॉल प्रोडक्शन अब एक 'मल्टी-फीडस्टॉक' मॉडल की ओर बढ़ चुका है, जिससे चीनी पर निर्भरता काफी कम हो गई है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करना और कृषि उत्पादों का बेहतर उपयोग करना है।
ग्रेन-बेस्ड इथेनॉल का बढ़ता ग्राफ
AIDA के डेटा के मुताबिक, अगस्त तक सप्लाई किए गए 895 करोड़ लीटर इथेनॉल में से 624 करोड़ लीटर अनाज से आया है, जो कुल सप्लाई का लगभग 70% है। इसमें 345 करोड़ लीटर मक्का (Maize), 214 करोड़ लीटर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के सरप्लस चावल और 64 करोड़ लीटर खराब हो चुके अनाज का इस्तेमाल हुआ है। खराब हो चुके या नॉन-फूड ग्रेड अनाज का उपयोग करके यह सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बिना आम जनता की खाद्य जरूरतों के साथ समझौता किए।
पॉलिसी और रिस्क फैक्टर्स
इन्वेस्टर्स के लिए सरकारी नीतियां सबसे अहम हैं। भारत में फूड इन्फ्लेशन को लेकर सरकार काफी संवेदनशील है। इतिहास में देखा गया है कि जब भी खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ा है, सरकार ने इथेनॉल के फीडस्टॉक मिक्स में बदलाव किए हैं। अगर भविष्य में मक्के की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं या सप्लाई में कमी आती है, तो सरकार प्रोक्योरमेंट पॉलिसी में बदलाव कर सकती है। ऐसी किसी भी सख्ती का सीधा असर डिस्टिलरी ऑपरेटरों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
भविष्य की राह
इथेनॉल सेक्टर अब एक्सपेंशन के अगले फेज की तैयारी कर रहा है, जिसमें कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) शामिल हैं। इसके अलावा, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-fuel vehicles) पर सरकार का जोर इथेनॉल की डिमांड को और बढ़ाने वाला है। हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स की सफलता एक स्थिर पॉलिसी एनवायरनमेंट पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सरकार की फीडस्टॉक पॉलिसी, रॉ मटेरियल के प्राइस ट्रेंड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बिक्री पर लगातार नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही फैक्टर्स इस सेक्टर की भविष्य की ग्रोथ तय करेंगे।
