Data Centers अब बिजली ग्रिड की लंबी देरी से बचने के लिए ऑन-साइट फ्यूल सेल (fuel cells) का सहारा ले रहे हैं। Bloom Energy जैसी कंपनियों के पास ऑर्डर्स की भरमार है, लेकिन निवेशकों को प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर नजर रखनी चाहिए।
बिजली की किल्लत और नया रास्ता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने Data Centers के सामने बिजली का एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अमेरिका जैसे देशों में पारंपरिक ग्रिड कनेक्शन मिलने में 3 से 6 साल का लंबा समय लग रहा है। इस देरी से बचने के लिए अब कई ऑपरेटर्स ऑन-साइट फ्यूल सेल सिस्टम लगा रहे हैं, ताकि वे बिना ग्रिड पर निर्भर रहे अपना काम तेज कर सकें।
Bloom Energy और Oracle की डील
इस बदलाव का सीधा फायदा फ्यूल सेल बनाने वाली कंपनियों को हो रहा है। Bloom Energy ने अपनी तीसरी तिमाही की रेवेन्यू में 138% का जबरदस्त उछाल दर्ज किया है, जो $1.24 बिलियन तक पहुंच गई है। कंपनी ने Oracle के साथ एक बड़ा करार किया है, जिसमें 2.8 गीगावाट क्षमता की संभावित खरीद शामिल है। सबसे बड़ा फायदा समय की बचत है; ये सिस्टम मात्र 2 महीने में चालू हो सकते हैं, जबकि पारंपरिक ग्रिड में सालों लग जाते हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
पूरे सेक्टर की ऑर्डर बुक अभी करीब 9 गीगावाट की है। हालांकि मांग बहुत अधिक है, लेकिन निवेशकों को कुछ सावधानियां भी बरतनी होंगी:
- सप्लाई चेन का रिस्क: स्विचगियर और हाई-वोल्टेज ट्रांसफार्मर जैसे जरूरी पार्ट्स की दुनिया भर में कमी है, जो प्रोजेक्ट्स में देरी कर सकती है।
- उत्पादन लक्ष्य: इंडस्ट्री 2030 तक प्रोडक्शन को 1.8 गीगावाट से बढ़ाकर 4 गीगावाट करने की कोशिश कर रही है।
- रेगुलेटरी और लागत: लोकल परमिट और ग्रिड बिजली के मुकाबले फ्यूल सेल की कॉस्ट कॉम्पिटिटिवनेस बनी रहेगी या नहीं, यह भविष्य की सफलता तय करेगा।
फिलहाल, निवेशकों को कंपनियों के ऑर्डर बुक पूरा करने की क्षमता और जरूरी कंपोनेंट्स की उपलब्धता पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
