भारत के ऊर्जा भविष्य का अहम कदम
यह मंजूरी देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की भारत की बड़ी योजना का एक अहम हिस्सा है। Mahi Banswara Rajasthan Atomic Nuclear Power Project (MBRAPP) में कुल ₹42,000 करोड़ का भारी निवेश किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की पहली दो यूनिट्स में 700 MWe क्षमता वाली स्वदेशी Pressurised Heavy Water Reactor (PHWR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो भारत के आत्मनिर्भर परमाणु कार्यक्रम को बढ़ावा देता है।
ज्वाइंट वेंचर बनाएगा ताकत
इस मेगा प्रोजेक्ट को Anushakti Vidyut Nigam Limited (ASHVINI) विकसित कर रही है। ASHVINI, Nuclear Power Corporation of India Limited (NPCIL) और NTPC Limited के बीच एक ज्वाइंट वेंचर है, जिसमें NPCIL की 51% हिस्सेदारी है और NTPC की 49% हिस्सेदारी है। यह साझेदारी NPCIL के परमाणु ऊर्जा संचालन के अनुभव और NTPC की विशाल प्रोजेक्ट प्रबंधन क्षमता का संगम है।
ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की योजनाएं
MBRAPP प्रोजेक्ट भारत के साल 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। वर्तमान में देश की परमाणु क्षमता लगभग 8.8 GW है, और यह प्रोजेक्ट 2.8 GW की अतिरिक्त क्षमता जोड़ेगा। यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ मिलकर ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।
चुनौतियां और अगला कदम
हालांकि, ₹42,000 करोड़ के इस बड़े प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना और आवश्यक फंड जुटाना एक बड़ी चुनौती है, जैसा कि इस तरह के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में आम है। इन नियामक बाधाओं को पार करने के बाद, ASHVINI अब यूनिट एक और दो के निर्माण के शुरुआती चरणों पर ध्यान केंद्रित करेगी।