ACME Solar को मिली ₹2,647 करोड़ की फंडिंग, 450 MW स्टोरेज प्रोजेक्ट होगा तैयार

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ACME Solar को मिली ₹2,647 करोड़ की फंडिंग, 450 MW स्टोरेज प्रोजेक्ट होगा तैयार

ACME Solar Holdings ने REC से ₹2,646.6 करोड़ का लॉन्ग-टर्म फाइनेंसिंग हासिल कर लिया है। यह पैसा एक नए सोलर और बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए है। कंपनी ने SJVN के साथ 25 साल का एग्रीमेंट किया है, जिसके तहत ₹6.74 प्रति यूनिट की दर से बिजली सप्लाई की जाएगी। इस डील से कंपनी को एक इंटीग्रेटेड एनर्जी स्टोरेज मॉडल के जरिए लंबे समय तक फिक्स्ड रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

ACME Solar के नए प्रोजेक्ट को मिली ₹2,646.6 करोड़ की फाइनेंसिंग

ACME Solar Holdings ने सरकारी पावर फाइनेंस कंपनी REC से ₹2,646.6 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग पैकेज सिक्योर किया है। इस फंड का इस्तेमाल 450 MW का सोलर प्रोजेक्ट बनाने में किया जाएगा, जिसमें 1,800 MWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज कैपेसिटी भी जोड़ी जाएगी। यह 20 साल की अवधि वाला लोन, पारंपरिक सोलर प्लांट्स की तुलना में अधिक लगातार पावर सप्लाई देने वाले प्रोजेक्ट्स की ओर एक बड़ा कदम है।

रेवेन्यू मॉडल और पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA)

इस प्रोजेक्ट की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी SJVN के साथ हुए 25 साल के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर टिकी है। इस प्लांट से बनने वाली बिजली ₹6.74 प्रति यूनिट के फिक्स्ड टैरिफ पर बेची जाएगी। निवेशकों के लिए, यह स्ट्रक्चर लंबी अवधि में स्पष्ट रेवेन्यू विजिबिलिटी प्रदान करता है, जिससे पावर मार्केट में होने वाले रोजमर्रा के प्राइस फ्लक्चुएशन का असर कम हो जाता है। फिक्स्ड-प्राइस मॉडल बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के लिए एक स्टैंडर्ड तरीका है, जो कंपनियों को गारंटीड कैश इनफ्लो के मुकाबले डेट ऑब्लिगेशन मैनेज करने में मदद करता है।

डेट मैनेजमेंट और विस्तार की रणनीति

ACME Solar के पास फिलहाल विंड, सोलर और हाइब्रिड एसेट्स सहित विभिन्न रिन्यूएबल सेगमेंट्स में कुल 8,070 MW का पोर्टफोलियो है। इतने बड़े साइज के लोन से कंपनी का बॉरोड कैपिटल पर निर्भरता बढ़ जाती है, जो कैपिटल-इंटेंसिव इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए सामान्य है। इस प्रोजेक्ट की सफलता कंपनी की समय पर कंस्ट्रक्शन पूरा करने और सोलर जनरेशन के साथ बैटरी स्टोरेज सिस्टम को इंटीग्रेट करने की टेक्निकल कॉम्प्लेक्सिटीज को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। प्रोजेक्ट कमीशनिंग में कोई भी देरी या बैटरी की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि प्रोजेक्ट के रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट को प्रभावित कर सकती है।

स्टोरेज सेक्टर के ट्रेंड्स

भारत का एनर्जी सेक्टर तेजी से 'फर्म' या 'डिस्पैचेबल' पावर पर जोर दे रहा है - यानी ऐसी एनर्जी जिसकी सप्लाई डिमांड पर की जा सके, भले ही सूरज न चमक रहा हो या हवा न चल रही हो। बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज के साथ सोलर पैनल को जोड़कर, कंपनी इस विकसित होती ग्रिड की जरूरत को पूरा करने के लिए खुद को पोजीशन कर रही है। हालांकि यह टेक्नोलॉजिकल कदम एक कॉम्पिटिटिव एडवांटेज देने का इरादा रखता है, इसमें स्टैंडर्ड सोलर सेटअप की तुलना में शुरुआती कैपिटल खर्च भी अधिक होता है। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनी हाई-ग्रोथ रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट में लगातार विस्तार की जरूरत के साथ अपने डेट लेवल्स को कैसे बैलेंस करती है। हितधारकों के लिए अगला बड़ा अपडेट प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन की प्रगति और कमर्शियल ऑपरेशंस की शुरुआत होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.