60 से अधिक देशों के गठबंधन ने ईरान द्वारा Strait of Hormuz में ट्रांजिट फीस वसूलने की कोशिश को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया है। फरवरी 2026 से जारी इस तनाव ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और कमोडिटी मार्केट में हलचल बढ़ा दी है।
यूरोपीय संघ (European Union) के नेतृत्व में 60 से ज्यादा देशों ने एक साझा मोर्चा खोलते हुए ईरान की इस मांग को ठुकरा दिया है। इस गठबंधन में यूके, जापान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देश शामिल हैं। इन देशों का तर्क है कि 'United Nations Convention on the Law of the Sea' के तहत अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सार्वजनिक संपत्ति हैं, जिन्हें ग्लोबल कॉमर्स के लिए खुला रखना अनिवार्य है।
शिपिंग पर मंडराया संकट
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल और LNG चोकपॉइंट है। 28 फरवरी, 2026 को शुरू हुए US-Iran संघर्ष के बाद से यहाँ व्यापार की रफ्तार बेहद धीमी हो गई है। युद्ध से पहले जहाँ रोजाना औसतन 125 जहाज यहाँ से गुजरते थे, वहीं 6 अक्टूबर को यह संख्या गिरकर महज 7 रह गई, जो कि एक ऐतिहासिक गिरावट है।
एनर्जी मार्केट पर असर
दुनिया की कुल ऑयल और गैस सप्लाई का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ट्रैफिक कम होने और समुद्री सुरक्षा के बढ़ते खतरों के कारण बीमा प्रीमियम (Insurance Premiums) में इजाफा हुआ है। टैंकरों को लंबे और महंगे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे ग्लोबल एनर्जी कीमतों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
निवेशकों को अब Brent Crude की कीमतों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या कूटनीतिक बातचीत से समुद्री व्यापार को फिर से बहाल किया जा सकेगा या अनिश्चितता का दौर लंबा चलेगा।
