Zerodha के Nithin Kamath ने अनिवार्य **2%** CSR नियम की आलोचना करते हुए इसे केवल 'Compliance' का जरिया बताया है। उन्होंने इसके बजाय कॉर्पोरेट टैक्स में **2%** की बढ़ोतरी का सुझाव दिया है ताकि फंड का सही वितरण हो सके।
नियम बनाम हकीकत
Nithin Kamath का मानना है कि 'Companies Act, 2013' के तहत मिलने वाला 2% का CSR फंड कई कंपनियों के लिए महज एक खानापूर्ति बन गया है। समस्या यह है कि कंपनियां अक्सर अपने आसपास के इलाकों में ही पैसा खर्च करती हैं, जिससे महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे विकसित राज्यों में ही सारा फंड सिमट जाता है। पिछड़े इलाकों को इसका लाभ नहीं मिल पाता क्योंकि कंपनियों के पास वहां प्रोजेक्ट चलाने की विशेषज्ञता की कमी होती है।
Kamath का 'टैक्स' वाला फॉर्मूला
Kamath ने प्रस्ताव रखा है कि इस 2% अनिवार्य खर्च को खत्म कर, कॉर्पोरेट टैक्स में ही 2% की वृद्धि कर दी जाए। उनका तर्क है कि अगर यह पैसा सरकार के पास जाएगा, तो वह इसे राष्ट्रीय स्तर पर उन जगहों पर खर्च कर सकती है जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे कंपनियां 2% की 'सीलिंग' (सीमा) के दायरे में नहीं बंधेंगी और समाज को वास्तविक फायदा होगा।
शॉर्ट-टर्म बनाम लॉन्ग-टर्म इम्पैक्ट
मौजूदा व्यवस्था में कंपनियां अक्सर रिपोर्ट कार्ड को चमकाने के लिए छोटे और मापने योग्य काम करती हैं, जैसे पेड़ लगाना या स्कूल बनाना। लेकिन समाज की गहरी समस्याओं को सुलझाने के लिए लंबे समय तक काम करने की जरूरत होती है। Zerodha की अपनी 'Rainmatter Foundation' मुनाफे का 10% इकोलॉजी और जलवायु परिवर्तन के लिए खर्च करती है, जो एक लॉन्ग-टर्म विजन है।
हालांकि, टैक्स आधारित मॉडल में एक बड़ा जोखिम यह है कि क्या सरकारी मशीनरी निजी कंपनियों की तरह कार्यक्षमता और नवाचार ला पाएगी? फिलहाल, यह मामला नीतिगत चर्चाओं का हिस्सा बना हुआ है।
