Zerodha के को-फाउंडर Nithin Kamath ने बताया है कि कैसे साल 2016 से अब तक भारत में रिटेल निवेशकों की संख्या **2 करोड़** से बढ़कर **13 करोड़** के पार पहुंच गई है। Kamath का मानना है कि इस बदलाव के पीछे Reliance Jio और Bharti Airtel का सस्ता डेटा और UPI जैसे डिजिटल टूल्स का सबसे बड़ा हाथ है।
डिजिटल बुनियादी ढांचे ने बदली तस्वीर
अगर आप सोच रहे हैं कि शेयर बाजार में अचानक इतनी भीड़ कहां से आई, तो इसका जवाब सिर्फ मार्केट का आकर्षण नहीं, बल्कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। Nithin Kamath के मुताबिक, 2016 से 2024 के बीच निवेशकों की संख्या में जो बड़ा उछाल आया है, वह Reliance Jio और Bharti Airtel द्वारा दी गई सस्ती और हाई-स्पीड इंटरनेट सर्विस का नतीजा है।
पहले शेयर बाजार में एंट्री करना बहुत कठिन था—लंबी कागजी कार्रवाई, दफ्तरों के चक्कर और लंबा इंतजार, जो सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित था। लेकिन अब आधार (Aadhaar) आधारित वेरिफिकेशन और UPI ने पूरे प्रोसेस को पेपरलेस और आसान बना दिया है।
डिस्काउंट ब्रोकरेज का बोलबाला
इस डिजिटल हाई-वे का फायदा Zerodha जैसी डिस्काउंट ब्रोकरेज फर्मों को हुआ। अब फिजिकल ऑफिस की जरूरत खत्म हो गई और छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों के लोग भी आसानी से शेयर बाजार से जुड़ सके। इससे ब्रोकरेज ने अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह ऑनलाइन-फर्स्ट बना दिया, जिससे एंट्री की लागत (Cost of Entry) काफी कम हो गई।
टेलीकॉम और मार्केट का गहरा कनेक्शन
आज एक दिलचस्प चक्र देखने को मिल रहा है। जिन टेलीकॉम कंपनियों ने निवेशकों के लिए डिजिटल रास्ते तैयार किए, आज वही कंपनियां खुद बाजार से पैसा जुटा रही हैं। यह रिश्ता अब एक ऐसा इकोसिस्टम बन गया है जहाँ टेलीकॉम कंपनियां और फाइनेंशियल मार्केट एक-दूसरे के विकास में सहायक बन गए हैं।
सुरक्षा और रेगुलेशन का दायरा
हालांकि, बाजार में इस आसान पहुंच (Ease of access) ने नए निवेशकों को जोखिम भरी ट्रेडिंग की तरफ भी धकेला है। नए निवेशक अक्सर बिना जोखिम समझे अटकलों वाली ट्रेडिंग (Speculative Trading) में फंस रहे हैं, जिस पर रेगुलेटर ने चिंता जताई है। आने वाले समय में मार्केट का फोकस सिर्फ नए यूजर जोड़ने पर नहीं, बल्कि निवेशकों की सुरक्षा और उनके रिस्क मैनेजमेंट को बेहतर बनाने पर होगा।
