जापानी येन में तूफानी तेजी, अमेरिकी डॉलर पर भारी, कच्चे तेल में 5% की गिरावट

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
जापानी येन में तूफानी तेजी, अमेरिकी डॉलर पर भारी, कच्चे तेल में 5% की गिरावट

आज एशियाई बाजारों में बड़ी उथल-पुथल देखी गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन कई महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी अमेरिका और जापान द्वारा डॉलर की मजबूती को रोकने के लिए की गई करेंसी इंटरवेंशन (Currency Intervention) के बाद आई है। वहीं, मिडिल ईस्ट में शांति समझौते की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5% की भारी गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिकी डॉलर पर येन की बढ़त

एशियाई बाजारों में सोमवार को बड़ी हलचल दिखी। जापानी येन ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जबरदस्त मजबूती दिखाई और यह कई महीनों के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और जापान की सरकारों ने मिलकर करेंसी मार्केट में दखल दिया है ताकि डॉलर की लगातार बढ़ती मजबूती पर लगाम लगाई जा सके। डॉलर का यह स्तर पिछले चार दशकों में सबसे ऊंचा था, जिसके कारण यह कदम उठाया गया।

शांति की उम्मीदों से तेल सस्ता

ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) में भी बड़ी गिरावट देखी गई। कच्चे तेल की कीमतों में ट्रेडिंग के दौरान लगभग 5% की कमी आई। अमेरिकी क्रूड फ्यूचर्स $80.58 प्रति बैरल तक गिर गए, जबकि ब्रेंट क्रूड $83.87 पर आ गया। तेल की यह गिरावट मिडिल ईस्ट में शांति समझौते की संभावित प्रगति की खबरों के कारण हुई, जिसका जिक्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी किया था। निवेशकों ने भू-राजनीतिक अस्थिरता कम होने की उम्मीद को भुनाया, जिससे ऊर्जा की कीमतों पर दबाव बढ़ा। सप्लाई की चिंताएं कम होने से कमोडिटी की कीमतें गिरीं, जिसका असर महंगाई (Inflation) और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।

एशियाई बाजारों पर असर

करेंसी और एनर्जी मार्केट की इस अस्थिरता का असर एशियाई एक्सचेंजों पर भी पड़ा। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स 1.9% गिरकर 63,140.68 पर बंद हुआ। दक्षिण कोरियाई बाजार में भी बड़ी गिरावट आई, जहां Kospi इंडेक्स 4.5% लुढ़क कर 6,298.75 पर आ गया। पिछले सत्र में 17.9% की शानदार तेजी के बाद यह एक बड़ी करेक्शन थी। टेक्नोलॉजी स्टॉक्स, जिन्होंने हाल में अच्छी बढ़त हासिल की थी, उनमें मुनाफावसूली (Profit-taking) देखने को मिली। Samsung Electronics और SK Hynix के शेयर 8% और 7.8% तक गिरे।

इसके विपरीत, हांगकांग का Hang Seng इंडेक्स 0.6% बढ़कर 26,038.92 पर बंद हुआ, जो क्षेत्रीय रुझान से अलग था। वहीं, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.5% गिरकर 3,812.97 पर रहा। यह मिला-जुला प्रदर्शन दिखाता है कि ये अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक तेल की कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के प्रति अलग-अलग तरह से संवेदनशील हैं।

टेक्नोलॉजी सेक्टर और सप्लाई चेन

करेंसी और तेल के अलावा, निवेशक टेक्नोलॉजी सेक्टर में देखे जा रहे अंतर पर भी नजरें गड़ाए हुए हैं। हाल के अमेरिकी बाजार के नतीजों में यह अंतर साफ दिखा। Amazon जैसी कंपनियों ने क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश के दम पर मजबूत मुनाफा कमाया, जिससे उसके शेयर 15% उछल गए। हालांकि, इस सेक्टर में जोखिम अभी भी बने हुए हैं। Apple के शेयर अच्छी कमाई के बावजूद 7.4% गिर गए, क्योंकि कंपनी ने संकेत दिया कि कंपोनेंट सप्लाई चेन (Component Supply Chain) की दिक्कतों की वजह से रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रह सकती है। AI के लिए चिप्स की वैश्विक दौड़ से बढ़ी ये कमी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनी हुई है। AI-संचालित ग्रोथ कितनी टिकाऊ होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हार्डवेयर सप्लाई, टेक्नोलॉजी सेक्टर में हो रहे भारी पूंजीगत खर्च के साथ तालमेल बिठा पाती है या नहीं।

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