जापानी येन पर डॉलर का वार! 160 के पार निकलने का खतरा, क्या सरकार फिर करेगी दखल?

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AuthorMehul Desai|Published at:
जापानी येन पर डॉलर का वार! 160 के पार निकलने का खतरा, क्या सरकार फिर करेगी दखल?

जापानी येन (Japanese Yen) एक बार फिर अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले दबाव में है और 160 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। यह स्थिति जापानी सरकार के हस्तक्षेप (Intervention) की सीमाओं को परख रही है।

सरकारी हस्तक्षेप की बढ़ती चिंता

जापानी येन के कमजोर होने की यह नई लहर जापानी नियामकों (Policymakers) की हिम्मत की परीक्षा ले रही है। पिछले कुछ समय से मुद्रा को सहारा देने के लिए किए गए बाजार हस्तक्षेप (Market Intervention) स्थायी समाधान देने में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।

आपको बता दें कि जुलाई 2026 के अंत में, जापान और अमेरिका ने मिलकर येन को मजबूत करने के लिए बाजार में $50 बिलियन से अधिक की राशि डाली थी। हालांकि, इस कोशिश से येन कुछ समय के लिए 155 के स्तर तक पहुंचा था, लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। अब बाजार इस बात को लेकर संशय में है कि जब येन की गिरावट के मूल कारण जस के तस हैं, तो ऐसे हस्तक्षेप कितने प्रभावी होंगे।

ब्याज दरों का बड़ा अंतर बना मुख्य समस्या

येन की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण जापान और अमेरिका के बीच ब्याज दरों (Interest Rates) का भारी अंतर है। बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) अपनी नीतिगत दर (Policy Rate) को 1% पर बनाए हुए है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने दरें 3.5% से 3.75% के दायरे में रखी हैं। इस बड़े अंतर के कारण, वैश्विक निवेशक 'कैरी ट्रेड' (Carry Trade) का सहारा ले रहे हैं। इस ट्रेड में, निवेशक ऊंची ब्याज दर वाले अमेरिकी संपत्तियों में निवेश करने के लिए कम ब्याज दर वाले जापानी येन में पैसा उधार लेते हैं। जब तक यह बड़ा ब्याज दर का अंतर बना रहेगा, डॉलर की मांग येन से ज्यादा बनी रहेगी, जिससे येन पर दबाव बना रहेगा।

वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए जोखिम

यह स्थिति अमेरिकी वित्तीय बाजारों और वैश्विक निवेशक भावना के लिए एक अनोखा जोखिम पैदा करती है। यदि येन 160 के निशान को पार करता है या उसके करीब बना रहता है, तो जापान को फिर से हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। बड़े पैमाने पर मुद्रा समर्थन अभियानों को फंड करने के लिए, जापान को अपने पास रखे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड (US Treasury Bonds) की होल्डिंग्स के कुछ हिस्से को बेचना पड़ सकता है।

अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की ऐसी किसी भी बड़ी बिकवाली से बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में वृद्धि होने की संभावना है, जो इक्विटी बाजारों (Equity Markets) में अस्थिरता (Volatility) की लहर पैदा कर सकती है। निवेशक बढ़ती बॉन्ड यील्ड के प्रति संवेदनशील होते हैं, क्योंकि इससे कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत बढ़ जाती है और शेयरों का आकर्षण कम हो जाता है। अमेरिकी बाजारों में गिरावट का असर अक्सर एशिया सहित अन्य प्रमुख बाजारों में भी सतर्कता के रूप में देखा जाता है।

निवेशक आगे क्या देख रहे हैं?

बाजार सहभागियों की अब मुख्य रूप से दो चीजों पर नजर है। पहला, जापानी सरकार द्वारा किसी भी और सीधी कार्रवाई की संभावना। दूसरा, और शायद इससे भी महत्वपूर्ण, मध्य सितंबर 2026 में बैंक ऑफ जापान की आगामी नीति बैठक है।

व्यापारियों में यह प्रबल उम्मीद है - जिसकी संभावना 60% से 78% तक अनुमानित है - कि बैंक ऑफ जापान उस बैठक में ब्याज दरों में वृद्धि का निर्णय ले सकता है। दर में वृद्धि, अमेरिकी दरों के साथ ब्याज दर के अंतर को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और यह अस्थायी बाजार हस्तक्षेपों की तुलना में येन को अधिक टिकाऊ समर्थन प्रदान कर सकता है। तब तक, यह मुद्रा संभवतः किसी भी आर्थिक डेटा या केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की टिप्पणियों के प्रति संवेदनशील बनी रहेगी जो मौद्रिक नीति की भविष्य की दिशा का संकेत देती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.