Xi Jinping का भारत दौरा: $112 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट और FDI नियमों में बड़े बदलाव पर नज़र

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AuthorNeha Patil|Published at:
Xi Jinping का भारत दौरा: $112 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट और FDI नियमों में बड़े बदलाव पर नज़र

सितंबर 2026 में होने वाले BRICS समिट के लिए चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping का भारत दौरा प्रस्तावित है। इस बीच, भारत और चीन के बीच **$112 बिलियन** का रिकॉर्ड ट्रेड डेफिसिट बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसे देखते हुए सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए FDI नियमों में ढील दी है।

चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के सितंबर 2026 में दिल्ली आने की संभावना है। 12-13 सितंबर को होने वाला यह BRICS समिट सात सालों में उनका पहला भारत दौरा हो सकता है। अगस्त 2026 में हुई स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स की बातचीत के बाद, यह समिट दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

ट्रेड डेफिसिट का बढ़ता बोझ

फिलहाल, भारत के लिए चीन के साथ $112 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट चिंता का विषय है। भारतीय कंपनियां टेलिकॉम इक्विपमेंट, कंप्यूटर हार्डवेयर, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। हालांकि भारत आयरन ओर और इंजीनियरिंग गुड्स का निर्यात करता है, लेकिन यह बढ़ते आयात के सामने काफी कम है।

FDI नियमों में बड़ा बदलाव

अपनी निर्भरता को कम करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट देने के लिए भारत ने मार्च 2026 से FDI पॉलिसी में रणनीति बदलाव किए हैं। अब उन विदेशी कंपनियों को 'ऑटोमैटिक रूट' से निवेश की मंजूरी मिल रही है, जिनमें चीनी इक्विटी 10% से कम है। इस कदम से अब तक $500 मिलियन से अधिक का नया निवेश भारत में आ चुका है।

बाजार के जानकारों के लिए यह एक 'बैलेंसिंग एक्ट' है। सरकार जहां निवेश को बढ़ावा दे रही है, वहीं 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहती। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह नई निवेश नीति भारत की चीन पर निर्भरता को कम कर पाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.