विश्व बैंक (World Bank) ने विकासशील देशों से किफायती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने का आग्रह किया है। इसका मकसद स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाना है। इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियों के बावजूद, AI से उत्पादकता बढ़ाने और तीन दशकों की सबसे धीमी ग्रोथ को पटरी पर लाने की उम्मीद है। यह रणनीति इंसानों को बदलने के बजाय उनकी क्षमताएं बढ़ाने पर केंद्रित है।
AI से सरकारी सेवाओं में सुधार का लक्ष्य
विश्व बैंक (World Bank) ने एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें विकासशील देशों को सरकारी कामों में किफायती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स को तेजी से अपनाने की सलाह दी गई है। बैंक का मानना है कि स्थानीय जरूरतों के हिसाब से AI समाधानों पर ध्यान केंद्रित करके, ये देश न्याय प्रणाली, कृषि विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े सुधार ला सकते हैं। यह कदम दशकों से चली आ रही विकास की खाई को पाटने में मददगार हो सकता है।
उत्पादकता बढ़ेगी, नौकरियां बचेंगी
वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार, विकासशील देशों में AI का आर्थिक असर विकसित देशों से अलग होगा। अनुमान है कि इन देशों में करीब 4.5% नौकरियों पर ऑटोमेशन का खतरा मंडरा सकता है, जो विकसित देशों के 14.2% के मुकाबले काफी कम है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 16.2% भूमिकाओं में AI टूल्स इंसानी श्रम को बदलने के बजाय उसकी मदद करेंगे, जिससे उत्पादकता में सुधार आएगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लागू करने की चुनौतियाँ
विश्व बैंक की यह रिपोर्ट सरकारों के लिए एक हकीकत का आईना है। AI का सफल इस्तेमाल बिजली आपूर्ति, डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी बुनियादी समस्याओं को सुलझाने पर निर्भर करेगा। बैंक का कहना है कि AI का विकास बिजली के व्यापक उपयोग जैसे पिछले तकनीकी बदलावों से भी तेज है, जिसके लिए तुरंत संस्थागत बदलावों की जरूरत है। इन कमजोरियों को दूर किए बिना, AI अपनाने वाले और पीछे रह जाने वाले देशों के बीच की खाई और चौड़ी हो सकती है।
धीमी ग्रोथ पर AI का असर
यह पहल ऐसे समय में आई है जब विकासशील अर्थव्यवस्थाएं पिछले तीस सालों में सबसे धीमी विकास दर का सामना कर रही हैं। विश्व बैंक AI को एक जीवनरेखा के रूप में देख रहा है, जिसका लक्ष्य इस दशक के अंत तक उत्पादकता को बढ़ाना है। टैक्स कलेक्शन, सामाजिक लाभ वितरण और आपदा प्रतिक्रिया जैसी प्रणालियों को बेहतर बनाकर, सरकारें वित्तीय बाधाओं के बावजूद सेवाओं का विस्तार कर सकती हैं। फोकस मुख्य रूप से डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि का उपयोग करके स्थानीय चुनौतियों को हल करने पर है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक आवश्यक सेवाएं पहुंच सकें। निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए यह देखना अहम होगा कि आने वाले महीनों में अलग-अलग देश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में कितना निवेश करते हैं, क्योंकि यही इन बड़े पैमाने की प्रौद्योगिकी तैनाती की सफलता तय करेगा।
