GDP आंकड़ों पर छिड़ा विवाद: Neelkanth Mishra ने आरोपों को नकारा, बताया डेटा पूरी तरह पारदर्शी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
GDP आंकड़ों पर छिड़ा विवाद: Neelkanth Mishra ने आरोपों को नकारा, बताया डेटा पूरी तरह पारदर्शी

World Bank के कार्यकारी निदेशक Neelkanth Mishra ने भारत की **7.8%** की GDP ग्रोथ दर को लेकर उठे सवालों का खंडन किया है। उन्होंने पूर्व वित्त सचिव S.C. Garg के दावों को गलत बताते हुए कहा कि आर्थिक आंकड़े वास्तविक ग्राउंड रियलिटी से मेल खाते हैं।

आंकड़ों पर छिड़ी जंग

भारत की GDP ग्रोथ को लेकर हाल ही में पूर्व वित्त सचिव S.C. Garg ने सवाल उठाए थे। उनका दावा था कि GDP के बेस ईयर (Base Year) में बदलाव के जरिए असल ग्रोथ 2.6% को छुपाकर 7.8% दिखाया गया है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए World Bank में भारत के कार्यकारी निदेशक Neelkanth Mishra ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और अधूरी जानकारी पर आधारित बताया है।

पारदर्शिता पर दिया जोर

Mishra ने स्पष्ट किया कि फरवरी 2026 में लाई गई नई GDP सीरीज पूरी तरह से पारदर्शी है और इसका मकसद इकोनॉमिक रिपोर्टिंग की सटीकता को बेहतर बनाना था। उन्होंने याद दिलाया कि बेस ईयर में बदलाव की जानकारी सरकार द्वारा मार्च 2026 में ही सार्वजनिक कर दी गई थी, इसलिए इसे अचानक उठाया गया कदम नहीं कहा जा सकता।

ग्राउंड पर क्या दिख रहा है?

सरकारी आंकड़ों की सत्यता साबित करने के लिए Mishra ने हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि अगस्त में SUV और कारों की बिक्री में 35% का उछाल आया है, जबकि कमर्शियल और टू-व्हीलर सेगमेंट में 20% से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है। इसके अलावा, टैक्स कलेक्शन और क्रेडिट विस्तार जैसे आंकड़े भी अर्थव्यवस्था में तेजी की गवाही दे रहे हैं।

निवेशकों के लिए संकेत

बाजार के जानकारों का मानना है कि विदेशी निवेशकों (FIIs) के लिए डेटा की विश्वसनीयता बहुत मायने रखती है। हालांकि अभी बहस सांख्यिकीय पद्धति पर है, लेकिन आने वाले समय में निवेशकों के लिए क्रेडिट ग्रोथ, कॉर्पोरेट अर्निंग्स और कंज्यूमर स्पेंडिंग जैसे डेटा पॉइंट्स पर नजर रखना ही सबसे अहम होगा, क्योंकि यही असली अर्थव्यवस्था की सेहत दर्शाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.