वर्ल्ड बैंक की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विकासशील देशों में इंसानी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर सकता है, न कि उन्हें बदलने में। इससे उत्पादकता में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन, यह सब निर्भर करेगा बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर। इन ज़रूरी चीज़ों के बिना, अमीर और गरीब देशों के बीच डिजिटल खाई और बढ़ सकती है।
AI: विकासशील देशों के लिए बड़ा अवसर
वर्ल्ड बैंक की हालिया रिपोर्ट ने विकासशील देशों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को उत्पादकता बढ़ाने और सेवाओं में सुधार का एक बड़ा ज़रिया बताया है। दुनिया भर में जहाँ AI से नौकरियों के जाने का डर है, वहीं रिपोर्ट बताती है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में लगभग 16% नौकरियों में AI टूल्स के ज़रिए उत्पादकता बढ़ सकती है। विकसित देशों में यह आंकड़ा 18% से ज़्यादा है। ख़ास बात यह है कि AI, ऐसे क्षेत्रों में इंसानों की मदद कर सकता है जहाँ अभी प्रोफेशनल्स की कमी है, जैसे स्वास्थ्य सेवा, खेती और सरकारी सेवाएं।
इंफ्रास्ट्रक्चर ही असली चाबी
AI के इन फायदों के बावजूद, वर्ल्ड बैंक चेतावनी देता है कि ये फायदे अपने आप नहीं मिलेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देशों में एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर गैप है जो AI के विकास में बाधा डाल सकता है। इन तकनीकों को अपनाने के लिए देशों को भरोसेमंद बिजली, व्यापक इंटरनेट कनेक्टिविटी और मज़बूत डेटा सिस्टम की ज़रूरत है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि विकसित देशों में जहाँ 14.2% नौकरियां ऑटोमेशन के ख़तरे में हैं, वहीं विकासशील देशों में यह सिर्फ़ 4.5% है। लेकिन, कम आय वाले देशों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी ही सबसे बड़ी रुकावट है। इन ज़रूरी सुविधाओं के बिना, देशों के बीच तकनीकी अंतर और बढ़ सकता है, जिससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ने का ख़तरा है।
विकास का एक अलग रास्ता
वर्ल्ड बैंक ग्रुप के चीफ इकोनॉमिस्ट, इंदरमित गिल ने कहा है कि विकासशील देशों को बड़े और महंगे AI मॉडल या डेटा सेंटर बनाने की ज़रूरत नहीं है। इसके बजाय, उन्हें उन प्रैक्टिकल एप्लीकेशन्स पर ध्यान देना चाहिए जो स्थानीय समस्याओं को हल कर सकें। AI टूल्स बिजली या इंटरनेट जैसी पुरानी तकनीकों की तुलना में बहुत तेज़ी से अपनाए जा रहे हैं, इसलिए सरकारों के पास एक्शन लेने का समय कम है। वर्ल्ड बैंक के एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI अभी टैक्स वसूलने, आपदा प्रबंधन और मेडिकल जांच जैसे महत्वपूर्ण कामों में मदद कर सकता है, भले ही वहाँ की संस्थागत क्षमता कम हो।
जोखिम और भविष्य के संकेत
निवेशकों और नीति निर्माताओं को ध्यान देना चाहिए कि एडवांस्ड AI मॉडल का कुछ अमीर देशों और चुनिंदा कंपनियों में केंद्रित होना वैश्विक इक्विटी के लिए एक रणनीतिक जोखिम है। विकासशील देशों के लिए, भविष्य में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारें कितनी तेज़ी से सहायक नीतियां लागू करती हैं और ज़रूरी ऊर्जा व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करती हैं। इन क्षेत्रों में सफलता तय करेगी कि AI आर्थिक समानता लाने का ज़रिया बनता है या मौजूदा वैश्विक असमानताओं को और गहरा करता है। इन देशों की AI टूल्स तक समान पहुंच प्रदान करने की क्षमता ही लंबे समय तक उत्पादकता और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखने का सबसे अहम कारक होगी।
