World Bank रिपोर्ट: 2070 तक दक्षिण एशिया के **52 करोड़** लोग झेलेंगे भीषण गर्मी का कहर!

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AuthorAditya Rao|Published at:
World Bank रिपोर्ट: 2070 तक दक्षिण एशिया के **52 करोड़** लोग झेलेंगे भीषण गर्मी का कहर!

वर्ल्ड बैंक (World Bank) की एक नई रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया को लेकर चिंताजनक खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2070 तक इस क्षेत्र के **52 करोड़** से ज़्यादा लोग खतरनाक गर्मी के स्तर का सामना करने पर मजबूर होंगे। यह आज की तुलना में चार गुना ज़्यादा है।

क्या है 'A Livable Future' रिपोर्ट?

वर्ल्ड बैंक की 'A Livable Future: Protecting Jobs and Growth from Extreme Heat in South Asia’s Cities' नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में भीषण गर्मी का असर तेज़ी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2070 तक, यहां 52 करोड़ लोग हर साल कम से कम एक महीने तक जानलेवा गर्मी की स्थिति में रहेंगे। यह जलवायु से जुड़े खतरों में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर

बढ़ते तापमान के आर्थिक परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। वर्तमान में, भीषण गर्मी के कारण हर साल 3.1 करोड़ फुल-टाइम नौकरियों के बराबर नुकसान हो रहा है। अगर समय रहते ज़रूरी कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक इस क्षेत्र की आर्थिक क्षमता लगभग 7% तक कम हो सकती है। यह सबसे ज़्यादा खुले में और असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को प्रभावित करेगा, जो ज़्यादा तापमान में काम करने की क्षमता खो रहे हैं। इससे कंपनियों को भी नुकसान होगा, जैसे कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति और उत्पादन क्षमता में कमी।

शहरों पर बढ़ता दबाव

'हीट आइलैंड' इफ़ेक्ट (Heat Island Effect) के कारण शहर ज़्यादा गर्म हो रहे हैं। कंक्रीट की इमारतें गर्मी को सोख लेती हैं, जिससे रात में भी शहर आसपास के ग्रामीण इलाकों से 10°C तक ज़्यादा गर्म हो सकते हैं। इससे ऊर्जा की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि कूलिंग के लिए बिजली की ज़रूरत बढ़ जाती है। साथ ही, शहरों की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी कम हो सकती है, क्योंकि उद्योगों और व्यावसायिक केंद्रों के लिए ऊर्जा की लागत बढ़ सकती है।

गर्मी-रोधी विकास की ओर बढ़ता कदम

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट बताती है कि भीषण गर्मी को अब सिर्फ मौसमी समस्या नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे एक बड़ी विकास चुनौती के रूप में देखना होगा। कंपनियों और नीति निर्माताओं को गर्मी-रोधी इंफ्रास्ट्रक्चर (Heat-Resilient Infrastructure) में भारी निवेश करना होगा। इसमें स्थायी कूलिंग समाधान, बेहतर वायु प्रवाह वाले शहरी डिजाइन और गर्मी को नियंत्रित करने वाली उन्नत निर्माण सामग्री का उपयोग शामिल है।

आने वाले दशकों में, दक्षिण एशियाई देशों का आर्थिक प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वे इन चुनौतियों का सामना करने के लिए कितनी अच्छी तरह अनुकूलित होते हैं। निवेशक और कॉर्पोरेट जगत इस पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि कंपनियाँ और सरकारें जलवायु अनुकूलन, बिजली ग्रिड की स्थिरता और ऊर्जा-कुशल कूलिंग में कितना निवेश करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.