प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ गई है। अब तक **54 लाख** से ज्यादा लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं, जिनमें **53.1%** महिला सब्सक्राइबर्स हैं। सरकार ने इस योजना के तहत **₹2,011 करोड़** से ज्यादा की मैचिंग फंडिग भी की है।
महिला श्रमिकों के लिए बड़ी राहत
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना में अब महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा हो गई है। 29 जुलाई 2026 तक, असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए इस वॉलंटरी पेंशन प्रोग्राम में कुल 54 लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। इनमें 28.67 लाख महिलाएं हैं, जो कुल एनरोलमेंट का 53.1% है।
सरकारी मदद और पेंशन की संरचना
PM-SYM योजना का मकसद 60 साल की उम्र पूरी करने के बाद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को हर महीने ₹3,000 की पेंशन देना है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, केंद्र सरकार लाभार्थी द्वारा किए गए भुगतान के बराबर राशि का मैचिंग कंट्रीब्यूशन देती है। केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री, शोभा करंदलाजे के अनुसार, सरकार ने इस मैचिंग कंट्रीब्यूशन के लिए ₹2,011.01 करोड़ की राशि आवंटित की है।
यह योजना एक कंट्रीब्यूशन मॉडल पर काम करती है। इसमें 18 से 40 साल के बीच के वो लोग, जिनकी मासिक आय ₹15,000 या उससे कम है, हर महीने ₹55 से ₹200 तक का भुगतान करते हैं। भुगतान की यह राशि योजना में शामिल होने की उम्र पर निर्भर करती है। फरवरी 2019 में लॉन्च हुई इस स्कीम को लंबे समय की सेविंग के लिए डिजाइन किया गया है, और पहली पेंशन फरवरी 2039 में मिलनी शुरू होगी।
कौन हो सकता है शामिल?
इस स्कीम में शामिल होना स्वैच्छिक है, लेकिन इसके लिए कुछ योग्यताएं जरूरी हैं। जो मजदूर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) जैसे बड़े सामाजिक सुरक्षा ढांचे के तहत नहीं आते, वे इसके पात्र हैं। इसके अलावा, इनकम टैक्स देने वाले लोग इस स्कीम का लाभ नहीं उठा सकते।
पार्टिसिपेशन बढ़ाने और खातों को एक्टिव रखने के लिए सरकार ने कई ऑपरेशनल बदलाव किए हैं। जो खाते निष्क्रिय हो गए थे, उन्हें फिर से चालू करने का समय एक साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया है। सरकार ई-श्रम पोर्टल का इस्तेमाल भी कर रही है, जिस पर 31.82 करोड़ से ज्यादा असंगठित मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। यह पोर्टल सामाजिक सुरक्षा सेवाओं को एकीकृत करने और संभावित लाभार्थियों तक पहुंचने का एक अहम जरिया है। स्कीम को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें भी की जाती हैं और कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) को रजिस्ट्रेशन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
