LTCG Tax: क्या LTCG टैक्स हटाने से सुधरेगा बाजार? एक्सपर्ट्स ने चेताया, सरकारी खजाने को होगा बड़ा नुकसान

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AuthorNeha Patil|Published at:
LTCG Tax: क्या LTCG टैक्स हटाने से सुधरेगा बाजार? एक्सपर्ट्स ने चेताया, सरकारी खजाने को होगा बड़ा नुकसान

क्या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करना भारतीय बाजार की समस्याओं का हल है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम न तो विदेशी निवेशकों की निकासी को रोकेगा और न ही हाई वैल्यूएशन जैसी दिक्कतों को दूर करेगा। इससे सरकार को सालाना **₹1.29 लाख करोड़** के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बाजार की हकीकत क्या है?

LTCG टैक्स को खत्म करने की मांग जोर पकड़ रही है, लेकिन इकोनॉमिक एनालिस्ट्स का मानना है कि यह भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा संरचनात्मक चुनौतियों के लिए कोई जादुई समाधान नहीं है। लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि बाजार में गिरावट का मुख्य कारण ग्लोबल फैक्टर हैं, जिन्हें घरेलू टैक्स कटौती से ठीक नहीं किया जा सकता।

क्यों नहीं होगा फायदा?

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में बढ़ोतरी ने ग्लोबल निवेशकों का ध्यान भारतीय बाजार से हटा दिया है। अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से ₹3.1 लाख करोड़ से ज्यादा की पूंजी निकाल ली है। इसके अलावा, कमजोर रुपया और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा दबाव बनी हुई हैं। ऐसे में सिर्फ टैक्स हटा देने से निवेशकों का भरोसा वापस नहीं लौटेगा।

महंगा वैल्यूएशन है बड़ी चुनौती

डोमेस्टिक मार्केट में कई कंपनियां अपने अर्निंग ग्रोथ (Earnings Growth) के मुकाबले काफी महंगे दाम पर ट्रेड कर रही हैं। हालांकि, SIP के जरिए मिल रहा घरेलू निवेश बाजार को सहारा दे रहा है, लेकिन इससे मार्केट वैल्यूएशन और कंपनी के असल प्रदर्शन के बीच एक बड़ा फासला बन गया है। टैक्स हटाने से केवल महंगे बाजार में और पैसा आने की उम्मीद बढ़ेगी, जो लॉन्ग टर्म के लिए ठीक नहीं है।

सरकारी खजाने पर दबाव

वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने LTCG से ₹1.29 लाख करोड़ जुटाए हैं, जो यूनियन बजट का एक बड़ा हिस्सा है। अगर सरकार इस राजस्व को छोड़ती है, तो उसे या तो इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास कार्यों पर खर्च कम करना होगा या फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) बढ़ने देना होगा। GST रेशनलाइजेशन और ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज के बीच सरकार पहले ही बजट के मामले में दबाव में है।

बाजार की सेहत मुख्य रूप से कॉर्पोरेट मुनाफे और मैक्रो-इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर टिकी है। निवेशकों को केवल टैक्स पॉलिसी में बदलाव की उम्मीद करने के बजाय, ब्याज दरों के ट्रेंड और कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.