Wheat Products Promotion Society (WPPS) ने FSSAI के सामने एक नए 'रिस्क-बेस्ड सेफ्टी टेस्टिंग मॉडल' का प्रस्ताव रखा है। अगर यह लागू होता है, तो भारत में गेहूं और अनाज के कारोबार करने वाली कंपनियों की कंप्लायंस कॉस्ट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर सीधा असर पड़ सकता है।
क्या है नया प्रस्ताव?
Wheat Products Promotion Society (WPPS) चाहती है कि गेहूं के उत्पादों की जांच के लिए मौजूदा सामान्य तरीकों को बदलकर एक स्टैंडर्डाइज्ड और 'रिस्क-बेस्ड' फ्रेमवर्क तैयार किया जाए। इस पहल का मुख्य मकसद एग्रीकल्चर सप्लाई चेन में फूड सेफ्टी मैनेजमेंट को आधुनिक बनाना है।
इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा है 'Wheat Safety Data Passport'। यह एक ऐसा डिजिटल डेटा सेट होगा, जिसके जरिए वेयरहाउस से लेकर मंडियों तक अनाज की क्वालिटी को ट्रैक किया जा सकेगा। इसके अलावा, सोसाइटी ने कीटनाशकों के 'मैक्सिमम रेजिड्यू लिमिट' (MRL) को लेकर पैदा हुई उलझनों को सुलझाने के लिए एक टेक्निकल वर्किंग ग्रुप बनाने की मांग की है, ताकि घरेलू मानकों और एक्सपोर्ट नियमों के बीच तालमेल बिठाया जा सके।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
अगर आप फूड प्रोसेसिंग और एग्री-लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर नजर रखते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। FSSAI पहले से ही कई कैटेगरी में 'रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम' (RBIS) लागू कर चुका है।
हालांकि नए नियम पारदर्शिता लाने के लिए हैं, लेकिन इससे कंपनियों की कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है। खास तौर पर शुरुआत में क्वालिटी कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश की जरूरत होगी। जो बड़ी कंपनियां पहले से मजबूत सिस्टम रखती हैं, उनके लिए यह एक कॉम्पिटिटिव एडवांटेज साबित हो सकता है, लेकिन छोटे प्लेयर्स के लिए यह नियम एक बड़ी चुनौती बनकर उभर सकते हैं।
अब बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि FSSAI इन प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाता है और क्या ये बदलाव टेस्टिंग प्रोसेस को आसान बनाते हैं या फिर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाते हैं।
