पश्चिम बंगाल सरकार **5 नवंबर, 2026** को अपनी नई औद्योगिक नीति (Industrial Policy) पेश करने जा रही है। इसका मुख्य मकसद प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना है, जिसके लिए सरकार लैंड कानूनों में बदलाव और सिंगल-विंडो क्लियरेंस जैसे बड़े कदम उठा रही है।
बड़े बदलावों की तैयारी
पश्चिम बंगाल सरकार 5 नवंबर, 2026 को राज्य सचिवालय 'नबान्न' से अपनी नई औद्योगिक नीति का ऐलान करेगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब पूरा फोकस इस बात पर है कि राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) और प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी देने के लिए क्या मैकेनिज्म अपनाती है।
क्या हैं मुख्य आकर्षण?
इन्वेस्टर्स की पुरानी मांग को देखते हुए सरकार अब 'सिंगल-विंडो क्लियरेंस' सिस्टम लागू करने पर जोर दे रही है ताकि लालफीताशाही कम हो सके। नई पॉलिसी के अहम बिंदु ये हैं:
- लैंड रिफॉर्म्स: West Bengal Urban Land (Ceiling and Regulation) Act और Land Reforms Act में संभावित संशोधन।
- बड़ा इंसेंटिव: ₹100 करोड़ से ज्यादा के निवेश पर बिजली टैरिफ में सब्सिडी की योजना।
- सेक्टर फोकस: फूड प्रोसेसिंग और एनर्जी सेक्टर (खासकर कोल बेड मीथेन) को बढ़ावा देने की तैयारी।
निवेशकों के लिए सावधानी जरूरी
नीति का ऐलान तो बड़ा है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स अभी 'Wait and Watch' की मोड में हैं। ओवरऑल पॉलिसी कितनी सफल होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जमीन अधिग्रहण से जुड़ी सामाजिक चुनौतियां और प्रशासनिक अड़चनें कितनी प्रभावी ढंग से सुलझाई जाती हैं। यदि ये बाधाएं दूर नहीं हुईं, तो बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी और लागत बढ़ने का जोखिम बना रह सकता है। अब सबकी नजरें 5 नवंबर को जारी होने वाली गाइडलाइन्स पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि क्या यह वाकई बिजनेस-फ्रेंडली माहौल बना पाएगी।
