पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नई 2026 इन्वेस्टमेंट पॉलिसी लॉन्च की है। सरकार का लक्ष्य **₹1 लाख करोड़** का नया निवेश आकर्षित करना है। इस बार जमीन विवादों से बचने के लिए 'लैंड पूलिंग' (Land Pooling) मॉडल को मुख्य आधार बनाया गया है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर 'वेस्ट बंगाल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी, 2026' का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य अब औद्योगीकरण के एक नए युग की ओर कदम बढ़ा रहा है। इस पॉलिसी का सबसे बड़ा फोकस अतीत के विवादों को पीछे छोड़ते हुए सिंगुर जैसे क्षेत्रों में दोबारा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है।
नई रणनीति: लैंड पूलिंग का सहारा
जमीन अधिग्रहण की पुरानी पेचीदगियों से बचने के लिए, सरकार अब डायरेक्ट लैंड परचेज और लैंड पूलिंग जैसे मॉडल्स पर काम कर रही है। इससे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया आसान होगी। शुरुआती चर्चाओं के अनुसार, अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) ने सिंगुर में प्रोजेक्ट लगाने में रुचि दिखाई है। वहीं, JSW ग्रुप पावर, पोर्ट्स, सीमेंट और स्टील जैसे सेक्टर्स में ₹50,000 करोड़ के निवेश की तैयारी में है। इन प्रोजेक्ट्स को इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट देने के लिए हुडको (HUDCO) और नाबार्ड (NABARD) जैसी वित्तीय संस्थाओं के साथ समन्वय किया जा रहा है।
बड़ी चुनौतियां और रिस्क
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार पुरानी देनदारियों को कैसे निपटाएगी। राज्य पर इंडस्ट्रियल इंसेंटिव्स के रूप में ₹50,000 करोड़ का भारी-भरकम बकाया है। कारोबारी जगत का भरोसा जीतने के लिए इस कर्ज को चुकाना अनिवार्य है।
साथ ही, नई पॉलिसी में प्लांट और मशीनरी में निवेश करने पर 120% तक की सहायता का प्रावधान रखा गया है, ताकि रोजगार के अवसर पैदा हो सकें। हालांकि, मार्केट जानकारों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये वादे जमीन पर उतर पाते हैं या पुरानी जमीन संबंधी कानूनी अड़चनें फिर से विकास की रफ्तार को धीमा करेंगी। JSW ग्रुप के प्रोजेक्ट्स और सिंगुर की जमीन पर होने वाली प्रोग्रेस इस पॉलिसी की सफलता का असली लिटमस टेस्ट होगी।
