पश्चिम बंगाल सरकार ने अब अपनी औद्योगिक नीति को प्राइवेट-लेड मॉडल में बदलने का फैसला किया है। इसके तहत राज्य सरकार अपनी जमीन का विकास अब इंडस्ट्री एसोसिएशन्स के जरिए कराएगी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर बाधाएं कम होने की उम्मीद है। हाल ही में राज्य ने **580 एकड़** जमीन **₹60,000 करोड़** के निवेश प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित की है।
पश्चिम बंगाल सरकार अब इंडस्ट्रियल लैंड मैनेजमेंट के लिए सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय एक नई दिशा अपना रही है। प्रशासन ने राज्य के पास मौजूद जमीन को लिमिटेड ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए इंडस्ट्री एसोसिएशन्स और चैंबर ऑफ कॉमर्स को सौंपने का निर्णय लिया है। इस नए मॉडल के तहत, प्राइवेट संस्थाएं स्पेशलाइज्ड इंडस्ट्रियल पार्क्स का निर्माण करेंगी, जबकि सरकार का मुख्य ध्यान रेगुलेटरी सपोर्ट और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने पर होगा।
नई लैंड-पूलिंग पॉलिसी की तैयारी
मौजूदा नीलामी प्रक्रिया से आगे बढ़ते हुए, राज्य सरकार गुजरात और हरियाणा की तर्ज पर 'लैंड-पूलिंग' पॉलिसी को भी लागू करने की योजना बना रही है। इसमें जमीन मालिकों को विकास में भागीदार बनाया जाएगा, ताकि अधिग्रहण (Acquisition) के दौरान होने वाली कानूनी पेचीदगियों से बचा जा सके। अक्टूबर तक इस पॉलिसी को औपचारिक रूप मिलने की उम्मीद है, जिससे औद्योगिक विस्तार के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार होगा।
बड़े निवेश और प्रोजेक्ट्स की घोषणा
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इसी हफ्ते 33 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए 580 एकड़ जमीन दी है। अनुमान है कि इससे अगले 3 सालों में करीब 62,000 नौकरियां पैदा होंगी और ₹60,000 करोड़ का निवेश आएगा।
प्रमुख आवंटनों में Websol Energy System को कोलकाता के पास फाल्टा इंडस्ट्रियल पार्क में 54.2 एकड़ जमीन मिली है, जहां वे 4 GW क्षमता वाला सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएंगे। इसके अलावा, Jupiter Defence को पुरुलिया में 256 एकड़ जमीन आवंटित की गई है, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक बड़ा कदम है।
निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?
भले ही प्राइवेट-लेड मॉडल से प्रोजेक्ट्स में तेजी आने की उम्मीद हो, लेकिन निवेशकों को इसके क्रियान्वयन (Implementation) पर नजर रखनी चाहिए। पश्चिम बंगाल में जमीन अधिग्रहण हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार प्राइवेट एसोसिएशन्स के साथ मिलकर कैसे समन्वय बैठाती है और क्या ये प्रोजेक्ट्स बिना देरी के जमीन पर उतर पाते हैं या नहीं।
