West Bengal सरकार छात्रों को स्मार्टफोन खरीदने के लिए दिए जाने वाले ₹10,000 के कैश ग्रांट को बंद करने जा रही है। अब इसकी जगह छात्रों को टैबलेट दिए जाएंगे ताकि पढ़ाई पर फोकस बढ़ सके और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित किया जा सके।
शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव
West Bengal सरकार अपनी स्टूडेंट वेलफेयर पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब तक 11वीं कक्षा के छात्रों को स्मार्टफोन खरीदने के लिए सीधे ₹10,000 की नकद राशि दी जाती थी, लेकिन सरकार अब इस मॉडल को बदलकर सीधे टैबलेट देने की योजना बना रही है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का मानना है कि मोबाइल फोन छात्रों के बीच ध्यान भटकाने का बड़ा जरिया बन गए हैं, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। गुजरात जैसे राज्यों से प्रेरणा लेते हुए, पश्चिम बंगाल सरकार अब छात्रों के लिए एक नियंत्रित डिजिटल माहौल तैयार करना चाहती है।
खरीद प्रक्रिया में होगा बड़ा बदलाव
पहले के कैश ट्रांसफर मॉडल में छात्र और उनके अभिभावक ओपन मार्केट से फोन खरीदने के लिए स्वतंत्र थे, जिससे रिटेल इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट को फायदा होता था। अब सरकार 'सेंट्रलाइज्ड प्रोक्योरमेंट मॉडल' की ओर बढ़ रही है। इसके तहत सरकार बड़े पैमाने पर टेंडर जारी करेगी, जो भविष्य में एड-टेक और हार्डवेयर कंपनियों के लिए बड़े अवसर और कड़ी प्रतिस्पर्धा पैदा कर सकता है।
नई योजनाओं का प्रभाव
यह कदम राज्य की कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा का हिस्सा है, जिसमें पुरानी 'Sabuj Sathi' योजना की जगह अब 'Sarathi' योजना को लाने की तैयारी है। फिलहाल सरकार उच्च गुणवत्ता वाले हार्डवेयर के लिए बजट बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, लेकिन अंतिम टेंडर और प्रोक्योरमेंट की समयसीमा अभी तय होनी बाकी है। निवेशकों और एड-टेक कंपनियों की नजर अब इस टेंडर प्रक्रिया के स्ट्रक्चर और टैबलेट की तकनीकी स्पेसिफिकेशन्स पर टिकी है।
