पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी BJP सरकार को 150 दिन पूरे हो गए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने औद्योगिक निवेश और जन-कल्याण पर जोर देने के साथ-साथ राज्य में Uniform Civil Code लागू करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी के गठन का ऐलान किया है, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
औद्योगिक और आर्थिक एजेंडा
राज्य सरकार ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of doing business) को सुधारने के लिए जमीन संबंधी नीतियों को सरल बनाना शुरू किया है। सरकार का मुख्य ध्यान रुकी हुई रेलवे परियोजनाओं को फिर से शुरू करने और ऊर्जा व लॉजिस्टिक्स सेक्टर में कैपिटल इन्वेस्टमेंट (Capital investment) आकर्षित करने पर है। सरकार ने Adani Group और Reliance Industries जैसी बड़ी कंपनियों से मिले निवेश प्रस्तावों को राज्य में बढ़ते भरोसे का संकेत बताया है। अब असली चुनौती इन वादों को जमीनी हकीकत और जॉब क्रिएशन (Job creation) में बदलने की होगी।
सामाजिक कल्याण के मोर्चे पर, महिलाओं के लिए 'अन्नपूर्णा योजना' शुरू की गई है। साथ ही, Ayushman Bharat जैसी केंद्र की उन स्कीमों को भी लागू किया गया है, जो पहले राज्य में ठंडे बस्ते में थीं। हालांकि, नौकरशाही की बाधाओं को दूर करना और डीबीटी (DBT) के जरिए लाभार्थियों तक पैसा पहुंचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विधायी बदलाव और सामाजिक नीति
आर्थिक सुधारों के अलावा, सरकार ने विधायी एजेंडे में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। 4 अक्टूबर, 2026 को सरकार ने अगले 6 महीनों के भीतर राज्य में Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की घोषणा की है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है। इसके अलावा, लव जिहाद और लैंड जिहाद के खिलाफ भी सख्त कानून लाने की तैयारी है।
बिजनेस एनवायरनमेंट और रिस्क
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह नीतिगत बदलाव एक महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल है। इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल ग्रोथ के प्रयासों को बाजार में पॉजिटिव तरीके से देखा जा रहा है, लेकिन आक्रामक विधायी और सामाजिक एजेंडे के चलते राजनीतिक ध्रुवीकरण का जोखिम भी बना हुआ है। किसी भी निवेशक के लिए अब सरकार की प्राथमिकता यह देखना होगी कि वह राष्ट्रवादी एजेंडे और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन कैसे बिठाती है।
