West Bengal Land Reform: इंडस्ट्रियल ग्रोथ के लिए लैंड रिफॉर्म क्यों है जरूरी?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
West Bengal Land Reform: इंडस्ट्रियल ग्रोथ के लिए लैंड रिफॉर्म क्यों है जरूरी?

वेस्ट बंगाल में इंडस्ट्रियल ग्रोथ की राह में पुरानी जमीन मालिकाना हक की जटिलताएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। राज्य में मैन्युफैक्चरिंग निवेश खींचने के लिए डिजिटाइज्ड टाइटल और साफ-सुथरी जमीन अधिग्रहण नीतियां वक्त की जरूरत हैं।

वेस्ट बंगाल का आर्थिक विकास इस समय ऐतिहासिक जमीन मालिकाना हक की उलझनों से जूझ रहा है। निवेशकों और कंपनियों के लिए इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन हासिल करना राज्य की ग्रोथ स्टोरी का सबसे अहम हिस्सा है। राज्य की जीडीपी (GDP) में हिस्सेदारी हाल के वर्षों में करीब 5.6% रही है, लेकिन 1950 के दशक से चले आ रहे लैंड टाइटल विवाद इस रफ्तार में रुकावट पैदा कर रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियां

जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी कई पेचीदगियां बंटवारे के बाद के दौर से शुरू हुई थीं। उस समय हुए बड़े विस्थापन ने अनौपचारिक बस्तियों और सेल्फ-ऑर्गनाइज्ड हाउसिंग को जन्म दिया। वक्त के साथ, इन बस्तियों ने एक ऐसा सोशल कॉन्ट्रैक्ट बना लिया, जिसने ऑक्यूपेंसी राइट्स को प्राथमिकता दी। हालांकि, यह व्यवस्था उस वक्त लोगों के लिए जरूरी थी, लेकिन अब यह बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण में बाधा बन रही है। सिंगुर और नंदीग्राम जैसे उदाहरण बताते हैं कि ऐसी जमीन को साफ-सुथरे औद्योगिक उपयोग के लिए बदलना कितना मुश्किल रहा है।

बैंक-योग्य (Bankable) एसेट की जरूरत

किसी भी इंडस्ट्रियल सेक्टर के फलने-फूलने के लिए जमीन का 'बैंकेबल' होना जरूरी है। अगर मालिकाना हक साफ न हो, तो कंपनियां न तो लोन ले पाती हैं और न ही जरूरी सरकारी क्लीयरेंस हासिल कर पाती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जर्मनी और वियतनाम के मॉडल से सीखा जा सकता है। वियतनाम का 'रेड बुक' सिस्टम लैंड यूज सर्टिफिकेट के जरिए जमीन को एक वैलिडेबल एसेट बनाता है, जिससे बिना निजीकरण के भी निवेश आसान हो जाता है।

आधुनिकीकरण की ओर कदम

बिजनेस माहौल को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि लैंड रिकॉर्ड्स का डिजिटाइजेशन पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। टाइटल का पारदर्शी डेटाबेस होने से मुकदमेबाजी कम होगी और जमीन ट्रांसफर की रफ्तार बढ़ेगी। इसके अलावा, टाइटल बैकलॉग को हल करने के लिए विशेष ट्रिब्यूनल का गठन निवेशकों को कानूनी मजबूती दे सकता है।

निवेशकों के लिए संकेत

जो निवेशक राज्य के औद्योगिक भविष्य पर नजर रखे हुए हैं, उन्हें जमीन अधिग्रहण से जुड़ी नई पॉलिसियों और डिजिटल लैंड मैपिंग की प्रगति पर ध्यान देना चाहिए। राज्य की इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग और पुरानी टाइटल समस्याओं का समाधान ही यह तय करेगा कि आने वाले समय में राज्य कितना मैन्युफैक्चरिंग निवेश खींच पाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.