West Bengal: Street Vendors Act में देरी से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट

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AuthorAditya Rao|Published at:
West Bengal: Street Vendors Act में देरी से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट

पश्चिम बंगाल में 2014 के Street Vendors Act को लागू करने में हो रही देरी से लाखों अनौपचारिक कामगार कानूनी सुरक्षा से वंचित हैं। यह स्थिति न केवल स्थानीय कारोबारों को प्रभावित कर रही है, बल्कि राज्य की आर्थिक उत्पादकता के लिए भी बड़ा जोखिम बनी हुई है।

पश्चिम बंगाल में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए कानूनी ढांचा ठप पड़ा है, जो भारत के सबसे बड़े अनौपचारिक कार्यबल में से एक के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और आर्थिक बाधा बन गया है। भले ही केंद्र का 'Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014' सड़क पर व्यापार को मान्यता देने का स्पष्ट रास्ता देता है, लेकिन राज्य इसके मुख्य प्रावधानों को लागू करने में संघर्ष कर रहा है। इसमें हर पांच साल में अनिवार्य सर्वेक्षण, कामगारों को आईडी सर्टिफिकेट देना और वार्ड की आबादी का 2.5% तक हिस्सा कवर करने वाले वेंडिंग जोन बनाना शामिल है।

निवेशकों और आर्थिक जानकारों के लिए, यह रेगुलेटरी गैप राज्य की आर्थिक प्लानिंग में बड़ी खामियों को दर्शाता है। 'Annual Survey of Unincorporated Sector Enterprises' के आंकड़े इस सेक्टर की नाजुक माली हालत को बयां करते हैं। प्रति वर्कर ग्रॉस वैल्यू एडेड लगभग ₹1.56 लाख सालाना है, जिसमें लेबर, डेप्रिसिएशन और ऑपरेटिंग कॉस्ट निकालनी होती है। बफर न होने के कारण ये छोटे कारोबार किसी भी अनियोजित कार्रवाई (जैसे बेदखली) के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं।

अक्सर कम बेरोजगारी के आंकड़े एक छलावा होते हैं, क्योंकि ये उस वास्तविकता को छुपा लेते हैं जहां औपचारिक नौकरी न मिलने पर लोग कम उत्पादकता वाले स्ट्रीट वेंडिंग में जाने को मजबूर हैं। जब प्रशासन बिना किसी विकल्प के केवल सौंदर्यीकरण (sidewalk clearing) को प्राथमिकता देता है, तो वह सीधे इन सूक्ष्म-व्यवसायों के रिवेन्यू मॉडल को नष्ट कर देता है।

सुरक्षा जमा, मासिक शुल्क और इंफ्रास्ट्रक्चर मेंटेनेंस (जैसे कचरा प्रबंधन) के लिए पारदर्शी नीति न होने से माहौल अनिश्चित बना रहता है। इस तरह का दृष्टिकोण छोटे उद्यमों को स्थिर होने या टैक्स बेस में प्रभावी योगदान देने से रोकता है। क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों के लिए सबसे बड़ी सीख यह है कि शहरी बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों और अनौपचारिक क्षेत्र की आर्थिक वास्तविकता के बीच बड़ा तालमेल गायब है। जब तक स्ट्रीट वेंडिंग को शहरी अर्थव्यवस्था का वैध हिस्सा नहीं माना जाएगा, तब तक इस विशाल कार्यबल की उत्पादकता सीमित रहेगी।

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