पश्चिम बंगाल सरकार ने लैंड पॉलिसी में बड़े बदलाव किए हैं। अब कंपनियां अपनी आवंटित जमीन पर प्रोजेक्ट का प्लान बदल सकती हैं। इसके लिए शर्त यह है कि उन्हें प्रति एकड़ कम से कम **100 नौकरियां** पैदा करनी होंगी।
पश्चिम बंगाल सरकार की इस नई लचीली लैंड-यूज पॉलिसी का मकसद उन कंपनियों को राहत देना है, जिनके प्रोजेक्ट्स लंबे समय से अटके हुए थे। अब सरकार जमीन वापस लेने के बजाय कंपनियों को अपने मूल प्रोजेक्ट प्लान में बदलाव करने की छूट देगी, ताकि औद्योगिक जमीन बेकार न पड़ी रहे।\n\n### रोजगार पर सरकार का जोर\nइस नीति में 'जॉब क्रिएशन' को प्राथमिकता दी गई है। नई गाइडलाइन्स के तहत, अगर कोई कंपनी अपना प्लान बदलना चाहती है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नया प्रोजेक्ट प्रति एकड़ 100 नौकरियां पैदा करे। यह साफ है कि सरकार प्रोजेक्ट की पुरानी शर्तों के बजाय उसके आर्थिक असर को ज्यादा महत्व दे रही है।\n\n### Silicon Valley Tech Hub पर फोकस\nयह बदलाव खासतौर पर कोलकाता के 'Bengal Silicon Valley Tech Hub' को गति देने के लिए किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यहां 250 एकड़ जमीन 42 कंपनियों को दी गई थी, लेकिन उनमें से सिर्फ 5 कंपनियां ही काम शुरू कर पाई हैं। ये एक्टिव प्रोजेक्ट्स सिर्फ 20 एकड़ में फैले हैं, जिनमें ₹2,000 करोड़ का निवेश हुआ है और 1,000 लोगों को रोजगार मिला है।\n\n### Adani Group को बड़ा फायदा\nइस नीति का सीधा असर Adani Group पर पड़ेगा, जिनके पास इस हब में 51.75 एकड़ जमीन है। पहले यहां डेटा सेंटर बनना था, लेकिन अब कंपनी वहां 2,000 बेड का 'Adani Arogya Mandir' अस्पताल बना रही है।\n\nनिवेशकों के नजरिए से यह एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे जमीन जब्त होने का खतरा टल गया है। हालांकि, अब देखना यह होगा कि कंपनियां इन नई योजनाओं को कितनी तेजी से जमीन पर उतारती हैं और क्या वे 100 नौकरियां प्रति एकड़ का लक्ष्य पूरा कर पाती हैं।
