पश्चिम बंगाल सरकार ने सुंदरबन में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए **₹1,200 करोड़** के मास्टर प्लान का ऐलान किया है। इस पहल से करीब **1.24 लाख** निवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिसमें सड़कों का जाल और नई जेट्टी का निर्माण शामिल है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुंदरबन इलाके में बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस योजना का मुख्य मकसद भौगोलिक रूप से कटे हुए इस क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ना और वहां के आर्थिक विकास को गति देना है।
कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार
इस पूरी परियोजना को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में 553 प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जबकि दूसरे बड़े चरण में 2,649 प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इसमें 1,169 सड़कों के निर्माण और 110 पुलिया (culverts) बनाने का काम होगा। इसके अलावा, 5 कंक्रीट जेट्टी और माल ढुलाई के लिए एक आधुनिक सुविधा भी बनाई जाएगी। पर्यावरण का ख्याल रखते हुए सरकार ₹100 करोड़ की लागत से इलेक्ट्रिक बोट्स की फ्लीट भी उतारेगी।
आर्थिक सुधार और चुनौतियां
इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा सरकार स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी जोर दे रही है। इसके तहत 13,800 से अधिक किसानों को बैटरी चालित स्प्रेयर दिए जाएंगे और फिशरी सेक्टर (मत्स्य पालन) के लिए ₹17 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है।
मुरीगंगा नदी पर बनने वाले ब्रिज का काम 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सुंदरबन का दलदली इलाका और कड़े पर्यावरणीय नियम निर्माण कार्य को चुनौतीपूर्ण और महंगा बना सकते हैं। निवेशकों और स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि क्या सरकार तय समयसीमा के भीतर इस बड़े प्रोजेक्ट को पूरा कर पाएगी या बजट में आगे चलकर और बदलाव करने पड़ेंगे।
