भारत में इस बार मानसून का हाल काफी खराब है और बारिश का आंकड़ा सामान्य से **15%** नीचे गिर गया है। साल **2009** के बाद यह सबसे सूखा सीजन माना जा रहा है, जिसका सीधा असर चावल, गन्ना और मक्का की बुवाई पर पड़ रहा है।
भारत में इस बार दक्षिण-पश्चिमी मानसून पिछले 15 वर्षों में सबसे कमजोर स्थिति में है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 'अल नीनो' (El Niño) के प्रभाव के कारण बारिश औसत से 15% कम हुई है। यह स्थिति न केवल कृषि उत्पादन के लिए खतरनाक है, बल्कि देश की पूरी इकोनॉमी के लिए चिंता का विषय बन गई है।
महंगाई और RBI का दबाव
अगस्त में फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) 5.95% के स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले 7 महीनों का उच्चतम स्तर है। अगर खाने-पीने की चीजों की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो Reserve Bank of India (RBI) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाएगा। बढ़ती महंगाई को काबू में रखने के लिए RBI को लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं, जिसका असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ना तय है।
ग्रामीण बाजार (Rural Market) पर असर
कमजोर बारिश का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण डिमांड को भी चोट पहुँचा रहा है। जब किसानों की फसल खराब होती है, तो उनकी खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। इसका सीधा असर ट्रैक्टर, फर्टिलाइजर और एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के बिजनेस पर पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में खर्च में गिरावट से इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।
सरकार के उपाय
हालात को काबू में रखने के लिए सरकार ने चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की इजाजत दी है और प्याज की सब्सिडी वाली बिक्री शुरू की है। हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि सप्लाई गैप ज्यादा होने पर ये उपाय केवल सीमित राहत ही दे सकते हैं। निवेशकों को अब आने वाले महीनों में फूड इन्फ्लेशन डेटा और कंपनियों के रूरल सेल्स के नतीजों पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
