Flipkart के भीतर चल रही इंटरनल करप्शन की खबरों ने हड़कंप मचा दिया है। कंपनी के कर्मचारियों पर वेंडर विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए **₹150 करोड़** से ज्यादा की रिश्वत लेने का आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
Walmart ने अपनी भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart में वित्तीय गड़बड़ी की जांच शुरू कर दी है। आरोपों के मुताबिक, कंपनी के स्मार्टफोन और लगेज डिवीजन के कर्मचारियों ने चुनिंदा वेंडर्स को अनुचित फायदा पहुँचाने और प्लेटफॉर्म पर उन्हें प्राथमिकता दिलाने के बदले ₹150 करोड़ से ज्यादा की रिश्वत ली है।
क्यों बढ़ी चिंता?
पिछले 3 सालों में यह तीसरी बार है जब Flipkart में वित्तीय अनियमितताओं की जांच हो रही है। इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में कई कर्मचारियों की छुट्टी हो चुकी है। चूँकि Walmart एक अमेरिकी लिस्टेड कंपनी है, इसलिए उन पर Securities and Exchange Commission (SEC) के सख्त नियमों का पालन करने का दबाव है।
लीडरशिप और IPO पर संकट
यह विवाद कंपनी के लिए ऐसे समय में आया है जब वह पहले ही आंतरिक अस्थिरता का सामना कर रही है। पिछले एक साल में कंपनी के 14 वाइस प्रेसिडेंट और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ने इस्तीफा दिया है। साथ ही, कंपनी के IPO को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे कर्मचारियों में अपने स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) को लेकर भारी निराशा है। अब कंपनी के लिए इस जांच को पारदर्शी तरीके से सुलझाना अपनी साख और भविष्य की IPO योजनाओं को बचाने के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
