इमर्जिंग मार्केट की रेस में भारत पिछड़ गया है और वियतनाम ने बढ़त बना ली है। अक्टूबर में विदेशी निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से रिकॉर्ड **₹45,785 करोड़** निकाले हैं, जबकि कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
बाजार में क्यों है घबराहट?
इमर्जिंग मार्केट्स की रैंकिंग में भारत का टॉप स्थान छिन गया है। पिछले एक महीने में भारतीय मार्केट कैपिटलाइजेशन में 2.2% की गिरावट आई है, जबकि वियतनाम के बाजारों में 2.7% की तेजी देखी गई है। यह बदलाव निवेशकों के बदलते भरोसे को साफ तौर पर दर्शाता है।
निर्यात में वियतनाम की बड़ी बढ़त
दोनों देशों के बीच प्रदर्शन का सबसे बड़ा अंतर 'एक्सपोर्ट ग्रोथ' है। भारत की निर्यात ग्रोथ 23% पर स्थिर है, जबकि वियतनाम 39.5% की तेजी के साथ भारत को पीछे छोड़ चुका है। हालांकि, भारत का मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स स्कोर 55.1 पर बना हुआ है, लेकिन ग्लोबल कॉम्पिटिशन में यह बढ़त अब कम नजर आ रही है।
FII की रिकॉर्ड बिकवाली का असर
अक्टूबर के पहले 26 दिनों में ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों से ₹45,785 करोड़ निकाल लिए हैं, जो जून के बाद से सबसे आक्रामक निकासी है। इसके साथ ही, रुपये को बचाने के चक्कर में भारत के फॉरेक्स रिजर्व में भी गिरावट आई है, जो सितंबर की शुरुआत से अब तक $64 बिलियन से ज्यादा घट चुका है।
महंगाई और मैक्रो चुनौतियां
पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें अक्टूबर में औसतन $120.3 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इससे महंगाई के 6% तक जाने का डर सता रहा है, जिससे RBI पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बन सकता है। इसके अलावा, दूसरी तिमाही के लिए ग्रोथ अनुमान घटकर 7% रह गया है, और खराब मॉनसून का असर अब कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
