उपराष्ट्रपति C.P. Radhakrishnan ने 5वें Kautilya Economic Conclave का आगाज किया। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता के बीच लचीली आर्थिक नीतियों पर जोर दिया और बताया कि कैसे **59 करोड़** जन धन खाते और **1.6 करोड़** GST टैक्सपेयर्स भारत की ग्रोथ की नींव बन चुके हैं।
नई दिल्ली में 3 अक्टूबर 2026 को 5वें Kautilya Economic Conclave (KEC 2026) का भव्य उद्घाटन हुआ। Institute of Economic Growth और Union Ministry of Finance द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में दुनिया भर के दिग्गज अर्थशास्त्री और नीति निर्माता 'Resilience in an Age of Flux' विषय पर चर्चा कर रहे हैं।
नीतियों में लचीलापन ही भविष्य
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में साफ कहा कि बदलते वैश्विक हालातों, जैसे कि भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु परिवर्तन के बीच सरकारी नीतियों में 'Policy Agility' (नीतिगत चपलता) बेहद जरूरी है। कठोर नीतियां आज के अनिश्चित दौर में बड़ी चुनौती बन सकती हैं, इसलिए सरकार का मुख्य फोकस बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाने पर है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे JAM (Jan Dhan-Aadhaar-Mobile) ट्रिनिटी ने सिस्टम से लीकेज को खत्म कर दिया है। अगस्त 2026 तक भारत में 59 करोड़ से ज्यादा जन धन खाते हैं, जिनके जरिए ₹53.4 लाख करोड़ से ज्यादा का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर किया गया है। इसके अलावा, GST टैक्सपेयर्स का आंकड़ा भी 2017 के 60 लाख से बढ़कर मई 2026 तक 1.6 करोड़ के पार पहुंच गया है। यह डेटा निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और संगठित बिजनेस माहौल का संकेत है।
समावेशी विकास और ग्रामीण शक्ति
उपराष्ट्रपति ने नेशनल रूरल लाइवलीहुड्स मिशन की सफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि 90 लाख सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के जरिए 10 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण महिलाएं अब उद्यमिता (Entrepreneurship) की राह पर हैं। पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से बाहर आना देश की कंजम्पशन डिमांड (Consumption Demand) को मजबूती दे रहा है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस कॉन्क्लेव में होने वाली चर्चाएं आने वाले समय में सरकारी ट्रेड पॉलिसी और फिस्कल प्रायोरिटीज को दिशा देने का काम करेंगी।
