राजस्व वसूली के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे निकल गया है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच राज्य ने **₹2.06 लाख करोड़** का टैक्स जमा किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **12%** की बड़ी बढ़ोतरी है।
टैक्स कलेक्शन में यूपी का जलवा
कॉम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश ने चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले पांच महीनों में ₹2.06 लाख करोड़ जुटाए हैं। राज्य का GST नेटवर्क इतना मजबूत है कि यहाँ 22 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड टैक्सपेयर्स हैं। यूपी के बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का नंबर आता है, जबकि केरल ने 22% की शानदार ग्रोथ रेट दर्ज कर सबको चौंका दिया है।
SGST बना कमाई का बड़ा जरिया
राज्यों के लिए स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (SGST) राजस्व का मुख्य आधार बना हुआ है। उत्तर प्रदेश ने अप्रैल से जुलाई के बीच सिर्फ SGST से ₹73,000 करोड़ जुटाए हैं, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹66,000 करोड़ थे।
इंफ्रास्ट्रक्चर की जंग
टैक्स कलेक्शन के साथ-साथ राज्य अब विकास कार्यों पर जोर दे रहे हैं। गुजरात इस दौड़ में सबसे आगे है, जिसने शुरुआती पांच महीनों में ₹29,600 करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक ने क्रमशः ₹21,000 करोड़ और ₹15,600 करोड़ का निवेश किया है।
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी पर जोर
15वें फाइनेंस कमीशन के चेयरमैन एन.के. सिंह ने राज्यों को सुझाव दिया है कि वे प्रॉपर्टी टैक्स और एक्साइज जैसे स्थानीय स्रोतों से कमाई बढ़ाने के लिए बेहतर डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करें। वहीं, आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने साफ कर दिया है कि सरकार का बजट विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है, इसलिए अब प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।
