वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। राज्य के एक्सपोर्ट को साल 2030 तक **₹5 लाख करोड़** तक पहुँचाने की तैयारी है। बेहतर सरकारी रेवेन्यू और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर यह कदम विदेशी कंपनियों को राज्य की ओर आकर्षित करेगा।
निर्यात में बड़ी छलांग की तैयारी
केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को एक औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने की रणनीति तैयार की है। वर्तमान में राज्य का एक्सपोर्ट लेवल ₹2 लाख करोड़ है, जिसे साल 2030 तक बढ़ाकर ₹5 लाख करोड़ तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह घोषणा वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल द्वारा की गई है।
रेवेन्यू में दिख रही बढ़त
एक्सपोर्ट के इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च कर रही है, जिसके लिए रेवेन्यू का सहारा लिया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी कलेक्शन जो 2016-17 में ₹14,273 करोड़ था, वह 2025-26 में उछलकर ₹60,728 करोड़ पर पहुँच गया है। इसी तरह, स्टैम्प ड्यूटी और लैंड रजिस्ट्रेशन से प्राप्त राजस्व भी ₹11,564 करोड़ से बढ़कर 2026-27 के बजट में ₹43,802 करोड़ दर्ज किया गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
सरकार का पूरा फोकस एक्सप्रेसवे, नोएडा के पास बन रहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट और औद्योगिक कॉरिडोर पर है। यह कवायद लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकती है।
चुनौतियां और जोखिम
इतना बड़ा लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और वैश्विक बाजार में मांग में उतार-चढ़ाव बड़े रिस्क फैक्टर हैं। भविष्य में निवेशकों को औद्योगिक टाउनशिप की प्रगति और लॉजिस्टिक हब की क्षमता उपयोग (Capacity Utilisation) पर पैनी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसी से तय होगा कि लक्ष्य हकीकत में बदल पाएगा या नहीं।
