उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत राज्य के **96%** से ज्यादा सरकारी स्कूलों की सूरत बदल दी गई है। **2018** में शुरू हुए इस प्रोग्राम में **19-पॉइंट** चेकलिस्ट के जरिए बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया गया है।
उत्तर प्रदेश का एजुकेशन सेक्टर अब एक नए दौर में है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, प्राइमरी और अपर-प्राइमरी स्कूलों में बुनियादी ढांचा अब काफी मजबूत हो चुका है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में बिजली, साफ-सफाई और बाउंड्री वॉल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को दूर करना था, जिसे अब 96% तक पूरा कर लिया गया है।
मॉडल बना 'कायाकल्प'
इस पहल की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि NITI Aayog ने इसे पूरे देश के लिए एक 'स्केलेबल मॉडल' माना है। 19-पॉइंट की जो मानक चेकलिस्ट तैयार की गई थी, उसने सरकारी स्कूलों में काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे मरम्मत के काम अब अस्थायी न होकर स्टैंडर्ड तरीके से हो रहे हैं।
सेकेंडरी एजुकेशन पर भी फोकस
प्राइमरी के बाद अब 'प्रोजेक्ट अलंकार' (Project Alankar) के जरिए सेकेंडरी स्कूलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इसमें कंप्यूटर लैब, हाई-स्पीड वाई-फाई और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए स्कूलों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस और फायर सेफ्टी के आधुनिक उपकरण भी लगाए गए हैं।
रिसोर्स ऑप्टिमाइजेशन की चुनौती
अगस्त 2025 में सरकार ने एक नई स्ट्रैटेजी अपनाई है। जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 से कम है, उन्हें आसपास के बेहतर सुविधाओं वाले स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च कम होगा और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर वाले स्कूलों में संसाधन और मजबूत होंगे। अब चुनौती इन हाई-टेक डिजिटल सिस्टम के रखरखाव और इस कंसोलिडेशन प्रोसेस को सही ढंग से चलाने की है।
