उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण क्षेत्रों में **2.36 करोड़** से ज्यादा नल कनेक्शन देकर एक बड़ा माइलस्टोन हासिल किया है। सरकार ने अब इस प्रोग्राम को 'JJM 2.0' के तहत **दिसंबर 2028** तक बढ़ा दिया है, जिसका मुख्य फोकस अब इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और सर्विस की निरंतरता पर है।
अब सर्विस और मेंटेनेंस पर जोर
उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी अहम भूमिका को और मजबूत किया है। राज्य में 5.07 लाख किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में इस मिशन के पुनर्गठन को मंजूरी दी, जिसके लिए कुल ₹8.69 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। अब सरकार का फोकस सिर्फ पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर घर में लंबे समय तक साफ पानी की सप्लाई बिना किसी रुकावट के मिलती रहे।
डिजिटल मॉनिटरिंग का नया दौर
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 'सुजलम भारत' (Sujalam Bharat) जैसी डिजिटल गवर्नेंस पहल शुरू की गई है। 'जल सारथी' (Jal Saarthi) ऐप जैसे टूल्स के जरिए पानी की सप्लाई को सोर्स से लेकर टैप तक रियल-टाइम में मॉनिटर किया जाएगा। इस तकनीक का उद्देश्य लीकेज को पहचानना और पानी के प्रेशर को सही बनाए रखना है, ताकि सरकारी निवेश बेकार न जाए।
इंफ्रा कंपनियों के लिए बदलते मौके
अब काम करने का तरीका बदल रहा है। जो इंफ्रा कंपनियां पहले सिर्फ सिविल वर्क और पाइपलाइन बिछाने का काम करती थीं, उन्हें अब ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) और स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट में शिफ्ट होना पड़ेगा। निवेशकों और कंपनियों के लिए यह एक बदलाव का दौर है, क्योंकि अब काम की रफ्तार के साथ-साथ सर्विस की क्वालिटी भी रेवेन्यू मॉडल को प्रभावित करेगी। हालांकि, कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए पुराने भुगतान में देरी और स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है, जिस पर बाजार की नजरें टिकी हैं।
